सहरसा: सहरसा नगर निगम में नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के निलंबन के बाद विवाद और गहरा गया है। एक तरफ 8 करोड़ 44 लाख रुपये की चार विकास योजनाओं को 68 हिस्सों में बांटकर टेंडर प्रक्रिया से बचने के आरोप में राज्य सरकार ने नगर आयुक्त को निलंबित कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ इस कार्रवाई के विरोध में वार्ड पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है। निलंबन का सरकारी आदेश सामने आते ही पार्षदों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
नगर निगम परिसर में जुटे वार्ड पार्षदों ने नगर आयुक्त के निलंबन पर विरोध जताया। अचानक शुरू हुए प्रदर्शन के बाद निगम का माहौल गरमा गया। सरकारी कार्रवाई के बाद पार्षदों का इस तरह विरोध में उतरना अब सहरसा नगर निगम की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।

8.44 करोड़ की चार योजनाओं को 68 हिस्सों में बांटने का आरोप
दरअसल, बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 3 नवंबर को जारी आदेश के माध्यम से बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी और सहरसा नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा को निलंबित किया है। उन पर नगर निगम की चार विकास योजनाओं की कुल 8 करोड़ 44 लाख रुपये की राशि को 68 हिस्सों में बांटने का आरोप है। जांच समिति के अनुसार, ऐसा खुली टेंडर प्रक्रिया से बचने के उद्देश्य से किया गया।
नगर विकास एवं आवास विभाग की पांच सदस्यीय जांच समिति ने 21 सितंबर को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। समिति ने अपनी जांच में प्रभात कुमार झा को जिम्मेदार मानते हुए विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली-2005 के तहत निलंबन की कार्रवाई की।
निलंबन की चिट्ठी जारी होते ही पार्षदों का विरोध
निलंबन का आदेश जारी होते ही वार्ड पार्षदों ने इसके विरोध में धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। पार्षदों ने नगर निगम परिसर में जुटकर सरकारी कार्रवाई पर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस विरोध के बाद नगर निगम में प्रशासनिक कार्रवाई और पार्षदों की नाराजगी आमने-सामने आ गई है।
फिलहाल पार्षदों की ओर से धरना-प्रदर्शन के जरिए विरोध जताया जा रहा है। उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं और आगे आंदोलन को किस दिशा में ले जाया जाएगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।
मेयर ने DM से की भुगतान रोकने की मांग
इधर, नगर आयुक्त के निलंबन के बाद नगर निगम की मेयर बैन प्रिया ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर निलंबित नगर आयुक्त से जुड़े सभी भुगतानों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।
मेयर ने पत्र में आशंका जताई है कि निलंबन के बाद पिछली तारीख डालकर अवैध भुगतान किए जा सकते हैं, जिससे नगर निगम को वित्तीय नुकसान हो सकता है। उन्होंने जनहित और निगम के कोष की सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रभात कुमार झा के हस्ताक्षर वाले या उनके द्वारा जमा किए गए सभी चेक और भुगतानों को रोकने की मांग की है।

अब नगर निगम में आगे क्या होगा?
एक ओर नगर आयुक्त पर योजनाओं में कथित वित्तीय अनियमितता को लेकर सरकार की कार्रवाई हुई है, तो दूसरी ओर वार्ड पार्षद इस निलंबन के विरोध में धरने पर बैठ गए हैं। मेयर की ओर से भुगतान रोकने की मांग ने मामले को और महत्वपूर्ण बना दिया है।
अब सवाल यह है कि पार्षदों का विरोध किस दिशा में आगे बढ़ेगा, प्रशासन उनकी मांगों पर क्या रुख अपनाएगा और नगर निगम की विकास योजनाओं तथा भुगतान की प्रक्रिया पर इसका क्या असर पड़ेगा। फिलहाल सहरसा नगर निगम में नगर आयुक्त के निलंबन को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज है।
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सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट…