गढ़वा: झारखंड के गढ़वा जिले में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। यहां तीन कृषक पाठशालाओं की शुरुआत की गई है, जिससे 21 गांवों के किसान सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे। सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक खेती से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान भवनाथपुर प्रखंड स्थित बनसानी कृषि पाठशाला की गतिविधियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जानकारी ली। उन्होंने यहां हो रही खेती, नर्सरी और बागवानी कार्यों की सराहना करते हुए इसे किसानों के लिए एक बेहतर मॉडल बताया।
इस कृषि पाठशाला की खास बात यह है कि यहां आधुनिक तकनीक से खेती की जा रही है। करीब 25 एकड़ क्षेत्र में सब्जियों और फलों की खेती के साथ-साथ नर्सरी तैयार की जा रही है। इस साल यहां के किसानों ने 84 टन तरबूज का उत्पादन कर नया रिकॉर्ड बनाया, जिसे कोलकाता सहित अन्य बाजारों में भेजा गया।
इसके अलावा यहां शिमला मिर्च, गोभी, बैंगन, लौकी और भिंडी की खेती की तैयारी चल रही है। वहीं आम, नींबू, संतरा, कटहल, अमरूद और आंवला जैसे फलदार पौधे भी बड़े स्तर पर लगाए गए हैं। किसानों को मशरूम उत्पादन सहित कई नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
इस योजना से जुड़े किसान न केवल खेती कर रहे हैं, बल्कि आधुनिक तरीके भी सीख रहे हैं। उनका कहना है कि इससे उनकी आमदनी बढ़ने की उम्मीद है और वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
जिला प्रशासन का कहना है कि यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में अहम कदम है। आने वाले समय में इस मॉडल को और विस्तार देने की योजना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इसका लाभ उठा सकें।
ये खबर भी पढ़े: Jharkhand: अब ATM से निकलेगा चावल-गेहूं, झारखंड में ‘ग्रेन ATM’ की एंट्री से पहले ही मचा बवाल!