रांची: झारखंड में जल्द ही राशन लेने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। अब लोगों को सरकारी राशन दुकानों की लाइन में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि सरकार ‘अन्नपूर्ति ग्रेन एटीएम’ शुरू करने जा रही है। इस मशीन के जरिए लाभार्थी बैंक एटीएम की तरह कभी भी चावल और गेहूं निकाल सकेंगे। हालांकि, इस नई व्यवस्था की शुरुआत से पहले ही इसका विरोध भी शुरू हो गया है।
भारत सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के निर्देश पर राज्य के रांची, दुमका और सरायकेला-खरसावां जिलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने की तैयारी है। राजधानी रांची के सदर प्रखंड में सबसे पहले यह सुविधा शुरू की जाएगी, जबकि बाकी दो जिलों में भी एक-एक मशीन लगाने की योजना है।
ग्रेन एटीएम पूरी तरह स्वचालित मशीन होगी। राशन कार्डधारक इसमें आधार या बायोमेट्रिक सत्यापन के जरिए लॉगिन करेंगे, जिसके बाद उन्हें निर्धारित मात्रा में अनाज मिल जाएगा। दावा है कि यह मशीन महज पांच मिनट में 70 किलो तक अनाज वितरित कर सकती है। सरकार का मानना है कि इससे राशन वितरण में पारदर्शिता आएगी और लोगों को कम अनाज मिलने की शिकायतों से राहत मिलेगी। साथ ही, लंबी कतारों से भी छुटकारा मिलेगा।
लेकिन इस योजना को लेकर राशन दुकानदारों में चिंता बढ़ गई है। झारखंड फेयर प्राइस डीलर एसोसिएशन ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि राज्य में हजारों राशन दुकानदार हैं और ग्रेन एटीएम लगने से उनके रोजगार पर असर पड़ेगा। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि पहले दुकानदारों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जाए।
फिलहाल सरकार इस योजना को पायलट स्तर पर लागू करने की तैयारी में है, लेकिन विरोध को देखते हुए आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि यह नई तकनीक लोगों के लिए राहत साबित होती है या रोजगार को लेकर नई बहस खड़ी करती है।
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