गया: जन्माष्टमी सिर्फ मंदिरों और घरों में ही खास नहीं रही, बल्कि अस्पतालों में भी इस बार इसका अलग रंग देखने को मिला। कई परिवार चाहते हैं कि उनके घर बच्चे का जन्म शुभ तिथि, शुभ समय और खास नक्षत्र में हो। यही वजह है कि गया के अस्पतालों में जन्माष्टमी के दिन प्लान्ड डिलीवरी को लेकर परिजनों में खास उत्साह देखने को मिला।
इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग बताए जाने के कारण कुछ परिवारों में शुभ मुहूर्त को लेकर विशेष रुचि देखी गई। डॉक्टरों के मुताबिक, सिजेरियन डिलीवरी में समय निर्धारित किया जा सकता है, इसलिए कुछ परिवार पहले से तारीख और समय तय करके अस्पताल पहुंच रहे हैं।
‘ठीक 12 बजे’ जन्म की डिमांड
अस्पतालों में कुछ परिजन खास तौर पर रात 12 बजे के आसपास डिलीवरी कराने की इच्छा जता रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धार्मिक मान्यता के कारण कुछ परिवार बच्चे के जन्म का समय पहले से तय कराना चाहते हैं।
मेडिवर्स अस्पताल की गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. तेजस्वी नंदन के अनुसार, आजकल कई लोग बच्चे के जन्म के लिए शुभ तारीख और मुहूर्त देखकर प्लान करते हैं। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को अस्पताल में 10 डिलीवरी हो चुकी थीं, जिनमें 6 लड़के और 4 लड़कियां थीं। रात 12 बजे के आसपास भी कुछ डिलीवरी प्लान होने की बात उन्होंने कही।
डॉक्टरों के लिए भी ‘मुहूर्त’ बड़ी चुनौती
डॉक्टरों के मुताबिक, मरीजों की ओर से किसी खास समय की मांग आने पर ऑपरेशन थिएटर की पूरी टीम को उसी हिसाब से तैयार करना पड़ता है। खासकर रात 12 बजे का समय तय होने पर सर्जिकल टीम, एनेस्थीसिया और नवजात शिशु की देखभाल करने वाली टीम को पहले से तैयार रखना पड़ता है।
हालांकि डॉक्टर यह भी स्पष्ट करते हैं कि नॉर्मल डिलीवरी को मनचाहे समय पर तय नहीं किया जा सकता। प्रसव की प्राकृतिक प्रक्रिया अपने समय पर शुरू होती है।
सबसे अहम सवाल—क्या सिर्फ मुहूर्त के लिए डिलीवरी टाली या बढ़ाई जा सकती है?
यहीं से मामला संवेदनशील हो जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चे और मां की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता है। सिर्फ शुभ समय पाने के लिए चिकित्सकीय रूप से जरूरी समय से पहले डिलीवरी कराने की कोशिश उचित नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चे को स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं। इसलिए डिलीवरी का फैसला मेडिकल जरूरत और डॉक्टर की सलाह के आधार पर ही होना चाहिए।
ज्योतिषाचार्य भी बोले—प्राकृतिक जन्म को दें प्राथमिकता
ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय मिश्रा ने जन्माष्टमी, रोहिणी नक्षत्र और शुभ योगों को धार्मिक दृष्टि से विशेष बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अभिभावकों को सिर्फ मुहूर्त के लिए जबरन सिजेरियन का दबाव नहीं बनाना चाहिए।
उनके मुताबिक, बच्चे का प्राकृतिक जन्म अपने आप में सबसे महत्वपूर्ण है और केवल शुभ समय के मोह में चिकित्सा संबंधी निर्णय लेना उचित नहीं है।
‘कृष्ण जन्म’ की आस्था और मेडिकल सावधानी
जन्माष्टमी पर अपने बच्चे को भगवान कृष्ण के जन्म समय के आसपास दुनिया में लाने की इच्छा कई परिवारों में आस्था से जुड़ी हो सकती है। अस्पतालों में इसकी झलक भी दिखाई दे रही है।
लेकिन डॉक्टरों के लिए हर जन्म का पहला नियम साफ है—शुभ मुहूर्त से पहले मां और बच्चे की सुरक्षा।
यानी जन्माष्टमी पर भले ही परिवार ‘12 बजे कान्हा के जन्म’ की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचें, लेकिन अंतिम फैसला बच्चे और मां की मेडिकल स्थिति के आधार पर ही होना सबसे जरूरी है।
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