पटना: दिल्ली के एक होटल में बिहार के एक मंत्री से जुड़े कथित विवाद ने अब नया सियासी मोड़ ले लिया है। प्रशांत किशोर ने घटना को लेकर ऐसा राजनीतिक तंज कसा कि निशाने पर सिर्फ मंत्री नहीं रहे, बल्कि बिहार के वोटर भी आ गए।
पीके ने कथित घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नेता के साथ जो हुआ, उससे ज्यादा बड़ा सवाल यह है कि ऐसे लोगों को वोट आखिर कौन देता है?
‘चप्पल की चोट’ को PK ने बना दिया चुनावी मुद्दा
प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर कोई नेता गलत काम करता है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए, लेकिन उससे भी बड़ा सवाल समाज और वोट की राजनीति का है।
उन्होंने बिहार की राजनीति में अपराध और विवादों से जुड़े नेताओं को समर्थन मिलने पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ नेताओं को दोष देने से व्यवस्था नहीं बदलेगी।
PK का निशाना—नेता से ज्यादा वोटर
प्रशांत किशोर का हमला यहीं नहीं रुका। उन्होंने बालू माफिया, शराब माफिया और अपराध से जुड़े लोगों को वोट देने की राजनीतिक प्रवृत्ति पर सवाल उठाया।
उनके बयान का मूल संदेश था—व्यवस्था बदलनी है तो पहले वोट देने की सोच बदलनी होगी।
‘राम राज्य’ की बात और जमीनी राजनीति पर सवाल
PK ने कहा कि जब तक बिहार का समाज खुद बदलाव के लिए तैयार नहीं होगा, तब तक व्यवस्था परिवर्तन संभव नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि गलत लोगों को चुनकर बेहतर शासन की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
गठबंधन नहीं, अपनी राह पर जन सुराज
प्रशांत किशोर ने यह भी स्पष्ट किया कि जन सुराज किसी राजनीतिक गठबंधन का हिस्सा बनने के सिद्धांत के पक्ष में नहीं है। उनका दावा है कि संगठन का उद्देश्य केवल विधायक-सांसद बनना नहीं, बल्कि बिहार की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव लाना है।
एक घटना, तीन निशाने
दिल्ली का कथित होटल विवाद → मंत्री पर हमला → और फिर सीधे वोटर पर सवाल।
यही वजह है कि PK का बयान अब सिर्फ ‘चप्पल कांड’ की चर्चा नहीं रह गया है। उन्होंने इसे बिहार की वोटिंग पॉलिटिक्स और व्यवस्था परिवर्तन से जोड़कर एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
हालांकि, होटल में हुई कथित घटना और उसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है।
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