कटिहार: जन्माष्टमी की रौनक के बीच कटिहार से सामने आई एक तस्वीर ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। तस्वीर में वर्दी पहने ट्रैफिक DSP सद्दाम हुसैन, उनकी पत्नी और गोद में कान्हा के रूप में सजा उनका नन्हा बेटा नजर आ रहा है। मजहब की पहचान अलग है, लेकिन तस्वीर में त्योहार की खुशी और आपसी सम्मान का रंग साफ दिखाई दे रहा है।
नन्हे मोहम्मद अली को जन्माष्टमी के मौके पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप यानी कान्हा की तरह सजाया गया। सिर पर मुकुट, मोरपंख और हाथ में बांसुरी के साथ उनका अंदाज इतना आकर्षक था कि सड़क से गुजरते लोगों की नजरें कुछ पल के लिए ठहर गईं।
सद्दाम हुसैन जब अपनी पत्नी के साथ बेटे को गोद में लेकर निकले तो आसपास मौजूद पुलिसकर्मी भी नन्हे कान्हा की मासूमियत के कायल हो गए। कई पुलिसकर्मियों ने उसके साथ तस्वीरें खिंचवाईं। देखते ही देखते यह पल कैमरे में कैद हो गया और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।
एक तस्वीर, कई संदेश
इस तस्वीर की खूबसूरती सिर्फ नन्हे कान्हा की पोशाक में नहीं, बल्कि उस संदेश में है जो यह तस्वीर बिना कुछ कहे दे रही है। भारत में त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होने का अवसर भी हैं।
जन्माष्टमी पर सद्दाम हुसैन का अपने बेटे को कान्हा के रूप में सजाना इसी साझा संस्कृति की झलक दिखाता है। किसी का त्योहार हो सकता है, लेकिन खुशी में शामिल होने का हक और उत्साह सबका हो सकता है।
कटिहार की यह तस्वीर अब एक परिवार के उत्सव से आगे बढ़कर आपसी सम्मान, भाईचारे और साझा खुशियों की तस्वीर बन गई है। यही वह रंग है जो भारत की विविधता को खास बनाता है—जहां अलग-अलग पहचान के बावजूद त्योहारों की खुशी दिलों को जोड़ देती है।
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