गया: जन सुराज के सूत्रधार एवं बांकीपुर विधायक प्रशांत किशोर ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की राजनीतिक भूमिका को लेकर सरकार के साथ-साथ शिक्षकों पर भी तीखा हमला बोला। गया के हरिदास सेमिनरी ऑडिटोरियम में आयोजित शिक्षक संवाद एवं नागरिक अभिनंदन समारोह में उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों में बिहार की शिक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब हुई है। उन्होंने इसे बिहार के इतिहास का “काला अध्याय” करार दिया।
शिक्षकों को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि एक समय शिक्षक ‘गुरुजी’ कहलाते थे, फिर ‘मास्टरजी’ हुए और अब स्थिति ऐसी हो गई है कि उन्हें ‘मस्टरवा’ कहा जाने लगा है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की सामाजिक प्रतिष्ठा और व्यवस्था में उनकी भूमिका लगातार कमजोर हुई है।
‘छह लाख शिक्षक, 30 से ज्यादा संघ, फिर भी मांगें 20 साल से लंबित’
प्रशांत किशोर ने शिक्षकों के संगठनात्मक बिखराव पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में करीब छह लाख शिक्षक हैं और उनके 30 से अधिक संघ हैं। इसके बावजूद शिक्षक अपनी मांगों को प्रभावी तरीके से सरकार तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षक चुनाव के समय अपनी पेशेवर पहचान के आधार पर एकजुट होकर मतदान नहीं करते, बल्कि जाति और अन्य सामाजिक समीकरणों में बंट जाते हैं। उनके अनुसार यही वजह है कि लंबे समय से चली आ रही मांगों पर सरकार गंभीरता से ध्यान नहीं देती।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि यदि वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर बड़ी संख्या में खड़े हों तो सरकार पर दबाव बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षकों के प्रतिनिधित्व वाले चुनावों में भी लंबे समय से सत्ता पक्ष के उम्मीदवारों का प्रभाव रहा है।
‘जिसे वोट दिया, उसी ने ठगा’
पीके ने शिक्षकों की राजनीतिक पसंद पर तंज कसते हुए कहा कि अलग-अलग चुनावों में शिक्षकों ने अलग-अलग राजनीतिक दलों का समर्थन किया, लेकिन उनकी मूल समस्याएं जस की तस बनी रहीं। उन्होंने शिक्षकों से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि केवल सरकार बदलने से नहीं, बल्कि मतदाताओं की राजनीतिक सोच बदलने से भी व्यवस्था में परिवर्तन आएगा।
उन्होंने कहा कि जन सुराज को पसंद करने वाले लोग उनके साथ फोटो और सेल्फी लेते हैं, लेकिन मतदान के समय जाति और धर्म के आधार पर बंट जाते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपने मुद्दों और बिहार के भविष्य को ध्यान में रखकर राजनीतिक निर्णय लें।
‘शिक्षा सुधरी तो बिहार की दिशा बदलेगी’
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार को बेहतर बनाने में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। यदि राज्य की शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी तो इससे शिक्षक ही नहीं, बल्कि छात्र, अभिभावक और समाज का हर वर्ग प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा कि बिहार में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए शिक्षकों की स्थिति मजबूत करना और उन्हें सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना जरूरी है।
जीडीपी के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल
समारोह के दौरान प्रशांत किशोर ने देश की आर्थिक स्थिति को लेकर जारी किए जा रहे जीडीपी के आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आंकड़ों में आर्थिक स्थिति बेहतर दिखाई जा सकती है, लेकिन आम लोगों की जिंदगी में इसका असर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने रोजगार और मजदूरी की स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि जब आम लोगों को अपने जीवन में आर्थिक बेहतरी महसूस नहीं हो रही है तो केवल आंकड़ों के आधार पर विकास का दावा करना पर्याप्त नहीं है।
राम मंदिर प्रकरण पर सरकार से ‘व्हाइट पेपर’ की मांग
श्रीराम मंदिर से जुड़े एक नए सीईओ की नियुक्ति के सवाल पर भी प्रशांत किशोर ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुराने पदाधिकारी की जिम्मेदारी तय किए बिना नए व्यक्ति की नियुक्ति से मामला खत्म नहीं होना चाहिए।
उन्होंने मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि सरकार को पूरे मामले पर व्हाइट पेपर जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है।
गया में आयोजित शिक्षक संवाद कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर के बयानों ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की राजनीतिक भूमिका और सरकार की नीतियों को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
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