पटना: पटना हाईकोर्ट ने मधुबनी के लखनौर थाना के पूर्व थानाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा की बर्खास्तगी से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने विभागीय कार्रवाई में गंभीर प्रक्रियागत खामियां पाए जाने के बाद बर्खास्तगी संबंधी आदेश को रद्द कर दिया और उन्हें नियमानुसार सेवा एवं सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया।
2011 की कार्रवाई से शुरू हुआ था मामला
मामला वर्ष 2011 में मुंबई पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी से जुड़ा था। कार्रवाई के दौरान आरोपी के फरार होने और जब्त सामान की सूची में कथित अनियमितता को लेकर तत्कालीन थानाध्यक्ष विजय कुमार सिन्हा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू हुई थी।
इसके बाद उन्हें निलंबित किया गया और विभागीय जांच के बाद 12 जून 2014 को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। बर्खास्तगी के खिलाफ उनकी अपील भी खारिज कर दी गई थी।
हाईकोर्ट ने उठाए विभागीय जांच पर सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि विभागीय जांच में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। याचिकाकर्ता को बचाव के लिए मांगे गए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
कोर्ट ने यह भी माना कि जांच की प्रक्रिया में ऐसी कमियां थीं, जिनसे संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।
एक ही अधिकारी पर उठे सवाल
अदालत के सामने यह पहलू भी आया कि जिस स्तर के अधिकारी ने मूल आदेश पारित किया, उसी स्तर पर अपील पर भी निर्णय लिया गया। हाईकोर्ट ने ऐसे मामले में निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों को महत्वपूर्ण माना।
पुराना आदेश रद्द, सेवा लाभ का निर्देश
हाईकोर्ट ने संबंधित बर्खास्तगी और अपीलीय आदेश को रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को उनकी सेवानिवृत्ति से संबंधित सेवा लाभ और अन्य देय राशि नियमानुसार देने का निर्देश दिया।
कोर्ट का यह फैसला विभागीय कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष प्रक्रिया के पालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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