भागलपुर/बेगूसराय: बिहार में गंगा का बढ़ता जलस्तर अब सिर्फ घाटों और खेतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आबादी के दरवाजे तक पहुंच गया है। भागलपुर के नवगछिया में गंगा ने आधी रात तटबंध को निशाना बनाया तो हालात इतने बिगड़े कि बिहार सरकार के ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के पैतृक गांव राघोपुर में भी पानी घुस गया। कटाव वाली जगह मंत्री के घर से महज करीब 500 मीटर दूर बताई जा रही है।
उधर बेगूसराय के बछवाड़ा में जमींदारी बांध टूटने के बाद पानी तेजी से ग्रामीण इलाकों में फैल गया। सड़कें डूब गईं, खेत जलमग्न हो गए और कई जगहों पर लोगों की जिंदगी नाव के सहारे चलने लगी है।
आधी रात गंगा ने बदला रुख, तटबंध पर मचा हड़कंप
भागलपुर के खरीक प्रखंड के राघोपुर-काजीकौरैया इलाके में देर रात गंगा का कटाव अचानक तेज हो गया। प्रशासन को करीब 2:30 बजे कटाव की सूचना मिली। कुछ ही देर में हालात इतने गंभीर हो गए कि तटबंध के आसपास रहने वाले ग्रामीणों में चिंता फैल गई।
कटाव प्रभावित क्षेत्र ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल के पैतृक आवास के बेहद करीब है। पानी गांव की ओर बढ़ने के बाद मंत्री के घर और आसपास के इलाके में भी पानी प्रवेश कर गया।
पिछले दिनों भी इसी इलाके में गंगा के कटाव ने चिंता बढ़ाई थी। रिपोर्टों के मुताबिक तटबंध का करीब 200 मीटर हिस्सा गंभीर कटाव की चपेट में आया था और ग्रामीण रातभर तटबंध को बचाने की कोशिश में जुटे रहे थे।
मंत्री का गांव बना हाई अलर्ट जोन
राघोपुर में पानी पहुंचने के बाद प्रशासन ने मौके पर निगरानी बढ़ा दी। भागलपुर डीएम अलंकृता पांडेय ने स्थल का निरीक्षण किया और कटाव रोकने के लिए आवश्यक उपाय करने के निर्देश दिए।
यहां सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नदी का बहाव तेज है और जलस्तर लगातार दबाव बना रहा है। ऐसे में तटबंध का कमजोर होना आसपास के गांवों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।
बेगूसराय में बांध टूटा, हजारों की जिंदगी प्रभावित
बेगूसराय के बछवाड़ा में झमटिया के पास जमींदारी बांध टूटने के बाद बाढ़ का पानी रानी पंचायतों की ओर तेजी से फैल गया। पानी ने खेतों को अपनी चपेट में ले लिया और कई ग्रामीण इलाकों में घरों तक पहुंच गया।
स्थानीय स्तर पर करीब 10 हजार लोगों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। कई सड़कों पर पानी भर जाने के कारण गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक कुछ इलाकों में लोग रोजमर्रा के काम के लिए नाव का सहारा लेने को मजबूर हैं।
खेत डूबे तो किसानों के सामने दोहरी मार
बाढ़ का सबसे सीधा असर किसानों पर पड़ा है। पानी खेतों में फैलने से खड़ी फसलें डूब गई हैं। इसके साथ ही पशुपालकों के सामने चारे की समस्या भी खड़ी हो रही है।
सड़क पर पानी आने के कारण आवागमन प्रभावित होने से ग्रामीणों की मुश्किल और बढ़ गई है। बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी चिंता बच्चों, बुजुर्गों, पशुओं और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की होती है।
गंगा का जलस्तर बढ़ा तो कई जिलों में चिंता
भागलपुर और बेगूसराय के अलावा गंगा का बढ़ता जलस्तर पटना, मुंगेर और बक्सर समेत कई जिलों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। बक्सर में गंगा वार्निंग लेवल पार कर खतरे के निशान के करीब पहुंच चुकी है, जबकि पटना सिटी के कुछ घाटों और आसपास के निचले हिस्सों में पानी पहुंचने की सूचना है।
नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ कटाव का खतरा भी बढ़ता है। ऐसे में तटबंधों की लगातार निगरानी प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बारिश कम, फिर भी नदी में उफान क्यों?
दिलचस्प बात यह है कि बिहार में इस मानसून अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है। इसके बावजूद गंगा का जलस्तर कई इलाकों में तेजी से बढ़ रहा है। इसकी एक बड़ी वजह ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश और नदियों में बढ़ता प्रवाह है।
यानी बिहार में कम बारिश का मतलब यह नहीं कि बाढ़ का खतरा खत्म हो गया। पहाड़ी और ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का असर नीचे की ओर बहने वाली नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है।
फरक्का बराज को लेकर भी बढ़ी सक्रियता
गंगा और कोसी के बढ़ते जलस्तर के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से बातचीत किए जाने और फरक्का बराज के गेट खोलने का आग्रह किए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे समय में नदी के प्रवाह को लेकर राज्यों के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि गंगा का पानी कई राज्यों से होकर गुजरता है।
मौसम भी दे रहा है चेतावनी
बाढ़ और कटाव की चिंता के बीच मौसम विभाग ने बिहार के कई हिस्सों में बारिश का अनुमान जताया है। इससे नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किल बढ़ सकती है।
आने वाले दिनों में बारिश और नदी के जलस्तर दोनों पर नजर रखना जरूरी होगा। यदि बारिश के साथ नदी का जलस्तर भी बढ़ता है तो पहले से कमजोर तटबंधों पर दबाव और बढ़ सकता है।
सबसे बड़ा सवाल—तटबंध कितना मजबूत?
भागलपुर और बेगूसराय की घटनाओं ने एक अहम सवाल खड़ा किया है—जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो तटबंधों की वास्तविक मजबूती कितनी है?
राघोपुर में पहले भी कटाव को लेकर चिंता सामने आ चुकी है। अब दोबारा उसी इलाके में पानी का दबाव बढ़ने से ग्रामीणों की सुरक्षा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। वहीं बेगूसराय में बांध टूटने के बाद हजारों लोगों के प्रभावित होने से बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों की भी परीक्षा शुरू हो गई है।
फिलहाल नजर नदी पर, गांवों में दहशत
भागलपुर में प्रशासन कटाव रोकने के प्रयास में जुटा है, जबकि बेगूसराय में बांध टूटने के बाद प्रभावित इलाकों में पानी फैल रहा है। दोनों जगह ग्रामीणों की नजर अब नदी के जलस्तर पर टिकी है।
इस पूरी स्थिति की सबसे अलग तस्वीर यही है कि जिस गंगा को श्रद्धालु आस्था के साथ देखते हैं, वही गंगा इस समय कई गांवों के लिए चिंता और चुनौती बन गई है। मंत्री के पैतृक गांव तक पानी पहुंचने और बेगूसराय में बांध टूटने की घटनाओं ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में जलस्तर और कटाव पर प्रशासन को बेहद करीब से नजर रखनी होगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: सिंहेश्वरनाथ मंदिर में बेकाबू हुई श्रद्धालुओं की भीड़, धक्का-मुक्की में 8 घायल; बैरिकेडिंग पर गिरने से महिला का सिर फटा!