मधेपुरा: सावन की अंतिम सोमवारी पर मधेपुरा के प्रसिद्ध सिंहेश्वरनाथ मंदिर में सोमवार सुबह श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अचानक अफरातफरी मच गई। जलाभिषेक के लिए उमड़ी भीड़ का दबाव बढ़ने के बाद कतार व्यवस्था बिगड़ गई और श्रद्धालुओं के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस दौरान कई लोग गिर पड़े। हादसे में करीब आठ श्रद्धालुओं के घायल होने की जानकारी सामने आई है। भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी भी चोटिल हो गया।
घटना के दौरान एक महिला श्रद्धालु लोहे की बैरिकेडिंग पर गिर गई, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी और सिर फट गया। बुजुर्ग समेत कुछ अन्य श्रद्धालु भी भीड़ में गिरकर चोटिल हुए। घायलों को तत्काल जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया जा रहा है।
रात एक बजे पूजा के बाद खुला पट, सुबह बढ़ता गया दबाव
जानकारी के अनुसार, सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर सिंहेश्वरनाथ मंदिर में रात से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। रात करीब एक बजे सरकारी पूजा संपन्न होने के बाद मंदिर का पट खोला गया। इसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए मंदिर परिसर की ओर बढ़ने लगे।
सुबह होते-होते श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती गई। मंदिर में प्रवेश के लिए बनाई गई कतार पर दबाव बढ़ने लगा। इसी दौरान कुछ स्थानों पर कतार टूट गई और लोग आगे बढ़ने लगे। भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि बैरिकेडिंग भी प्रभावित हुई। इसके बाद कुछ देर के लिए वहां भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
बैरिकेडिंग पर गिरी महिला, कई लोग जमीन पर गिरे
धक्का-मुक्की के दौरान एक महिला श्रद्धालु अपना संतुलन खो बैठी और लोहे की बैरिकेडिंग पर जा गिरी। उसके सिर में चोट लगने के बाद आसपास मौजूद लोगों में भी अफरातफरी मच गई। इसी दौरान कुछ अन्य श्रद्धालु भी गिर पड़े।
घटना में करीब आठ लोगों के घायल होने की सूचना है। घायलों में सहरसा जिले के सोनबरसा थाना क्षेत्र के जलसीमा वार्ड-4 निवासी रूना देवी, सुपौल के मानगंज निवासी सिंटू कुमार और सुलेना देवी के अलावा ड्यूटी पर तैनात सिपाही सिद्धांत कुमार के नाम सामने आए हैं।
भीड़ संभालने में पुलिसकर्मी भी चोटिल
स्थिति को नियंत्रित करने के दौरान पुलिसकर्मियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। श्रद्धालुओं की भीड़ को पीछे हटाने और कतार को दोबारा व्यवस्थित करने के दौरान एक पुलिसकर्मी चोटिल हो गया। उसकी वर्दी भी फट गई।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए। मधेपुरा के डीएम, एसपी, एसडीएम और एसडीपीओ मंदिर परिसर पहुंचे और मौके पर स्थिति का जायजा लिया। अतिरिक्त पुलिस बल को बुलाया गया और श्रद्धालुओं को दोबारा व्यवस्थित कतार में लगाया गया।
करीब आधे घंटे बाद स्थिति हुई सामान्य
प्रशासन और पुलिस की सक्रियता के बाद करीब आधे घंटे में स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया। श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराया गया। इसके बाद जलाभिषेक की प्रक्रिया भी जारी रही। मंदिर परिसर में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
मंदिर न्यास समिति और प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से संयम बनाए रखने, धक्का-मुक्की नहीं करने और निर्धारित कतार में रहकर ही दर्शन-पूजन करने की अपील की गई।
पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का था अनुमान
अंतिम सोमवारी को लेकर प्रशासन ने सिंहेश्वरनाथ मंदिर में बड़ी भीड़ की पहले से आशंका जताई थी। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस दिन करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान था। इसी को देखते हुए प्रशासन ने मंदिर परिसर में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष व्यवस्था की थी।
श्रद्धालुओं को मुख्य प्रवेश द्वार से प्रवेश कराने के बाद अलग-अलग मार्ग से कतार में आगे बढ़ाने की व्यवस्था बनाई गई थी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग कतार की योजना थी। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से गर्भगृह तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी की व्यवस्था भी की गई थी।
प्रशासन ने पहले ही की थी व्यापक तैयारी
सावन की अंतिम सोमवारी को देखते हुए जिला प्रशासन ने 23 अगस्त की रात से ही मंदिर परिसर में अधिकारियों की पालीवार प्रतिनियुक्ति की थी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्टील और अन्य बैरिकेडिंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से मंदिर में प्रवेश कराने तथा पूजा के बाद उन्हें व्यवस्थित तरीके से बाहर निकालने की जिम्मेदारी अधिकारियों को दी गई थी।
प्रशासन की ओर से मंदिर परिसर के अलावा आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी। पार्किंग, प्रवेश-निकास और श्रद्धालुओं की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
अंतिम सोमवारी पर पूरे बिहार में आस्था का सैलाब
सिंहेश्वरनाथ मंदिर की तरह सोमवार को बिहार के अन्य प्रमुख शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मुजफ्फरपुर के बाबा गरीबनाथ मंदिर, समस्तीपुर के थानेश्वर स्थान, मोतिहारी के सोमेश्वर महादेव मंदिर, लखीसराय के अशोक धाम और पटना के विभिन्न शिव मंदिरों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं।
सुल्तानगंज और अन्य गंगा घाटों पर भी कांवरियों की बड़ी संख्या पहुंची। यहां से गंगाजल लेकर श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम, सिंहेश्वरनाथ और दूसरे शिवालयों के लिए रवाना हुए। अंतिम सोमवारी को लेकर कांवरिया मार्गों पर पूरे दिन भक्तों की आवाजाही बनी रही।
हादसे ने फिर उठाए भीड़ प्रबंधन पर सवाल
सिंहेश्वरनाथ मंदिर में घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल इतनी बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के बीच भीड़ प्रबंधन को लेकर उठ रहा है। प्रशासन ने पहले से ही भारी भीड़ का अनुमान लगाकर बैरिकेडिंग और अधिकारियों की तैनाती की थी, लेकिन वास्तविक भीड़ का दबाव बढ़ने के बाद कुछ समय के लिए व्यवस्था चरमरा गई।
हालांकि, पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद स्थिति को जल्द नियंत्रित कर लिया गया। फिलहाल मंदिर में पूजा-अर्चना और जलाभिषेक जारी है तथा श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन कराने की कोशिश की जा रही है।
मधेपुरा पुलिस ने श्रावणी मेला-2026 की अंतिम सोमवारी को लेकर विशेष सूचना की जारी
पुलिस के अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित तरीके से की जा रही है। भीड़ पूरी तरह नियंत्रण में है तथा दर्शन-पूजन सुचारु रूप से जारी है। मंदिर परिसर और आसपास की स्थिति पूर्णतः सामान्य बताई गई है।
मधेपुरा पुलिस एवं जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा, यातायात और भीड़ प्रबंधन की समुचित व्यवस्था की गई है।
पुलिस ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि किसी भी भ्रमक वीडियो, अफवाह या अधूरी जानकारी पर ध्यान न दें तथा केवल आधिकारिक व सत्यापित सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
किसी भी सहायता के लिए 112 पर संपर्क करें।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: डाकघर की चौखट से कांवरिया पथ तक पहुंची जनसेवा, सेवा भाव लेकर रवाना हुआ डाक कर्मियों का जत्था!