पटना: बिहार कैबिनेट की बैठक बुधवार को सिर्फ 27 फैसलों के लिए नहीं, बल्कि बैठक के भीतर हुई कथित तीखी बहस को लेकर भी चर्चा में आ गई। जानकारी के मुताबिक, दो मंत्रियों के बीच विवाद बढ़ा तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को खुद हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराना पड़ा। हालांकि, दोनों के बीच किस मुद्दे पर बहस हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बैठक खत्म होने तक सरकार ने ऐसे कई फैसलों पर मुहर लगा दी, जिनका सीधा असर आम लोगों पर पड़ सकता है। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा 47 बड़े पुलों और 55 स्टेट हाईवे पर टोल व्यवस्था की तैयारी को लेकर है। हालांकि, अभी तत्काल टोल वसूली शुरू नहीं होगी। पहले ट्रैफिक सर्वे, टोल प्लाजा और तकनीकी व्यवस्था तैयार की जाएगी।
एक तरफ विवाद, दूसरी तरफ 27 फैसलों की बौछार
कैबिनेट ने बेगूसराय के बरौनी में 700 एकड़ जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, पटना के नेहरू पथ को 7.20 किलोमीटर तक चौड़ा करने और अरवल में मेडिकल कॉलेज-अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध कराने जैसे प्रस्तावों को मंजूरी दी।
छात्रों के लिए भी बड़ा फैसला हुआ। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना को 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई और उच्च शिक्षा के लिए 4 लाख रुपये तक के शिक्षा ऋण का प्रावधान बरकरार रखा गया।
अब असली सवाल—टोल का बोझ कितना होगा?
सरकार ने टोल व्यवस्था की तैयारी के लिए करीब 30.95 करोड़ रुपये की सलाहकार सेवा को मंजूरी दी है। पहले चरण में चिन्हित पुलों और स्टेट हाईवे पर ट्रैफिक का अध्ययन होगा, जिसके बाद शुल्क व्यवस्था और टोल प्लाजा को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
यानी कैबिनेट की बैठक में अंदर मंत्रियों की बहस ने माहौल गरमाया और बाहर टोल के फैसले ने आम लोगों के बीच सवाल खड़े कर दिए।
अब नजर इस बात पर है कि कैबिनेट में हुआ विवाद किस मुद्दे पर था और चिन्हित सड़कों-पुलों पर टोल कब से और कितनी दर पर लागू होगा।
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