शेखपुरा: मानसून की पहली जोरदार बारिश ने शेखपुरा नगर परिषद की बरसात से पहले की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आधे घंटे से अधिक हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों के सामने जलजमाव की ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने नाला सफाई और जल निकासी व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी।
बारिश के बाद शेखपुरा समाहरणालय परिसर, अनुमंडल कार्यालय, निबंधन कार्यालय और विधिज्ञ संघ परिसर के आसपास पानी जमा हो गया। देखते ही देखते सड़कें और परिसर झील जैसे नजर आने लगे। कार्यालय आने-जाने वाले आम लोगों के साथ-साथ कर्मचारियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

कई जगहों पर बारिश का पानी घंटों जमा रहा, जिससे लोगों को मजबूरी में पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। जिला सहकारिता कार्यालय के सामने भी जलजमाव की स्थिति बनी रही। वहीं शहर के वीआईपी रोड पर नाले का गंदा पानी सड़क पर बहने लगा, जिससे राहगीरों की परेशानी और बढ़ गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली बारिश आते ही सारी तैयारी धराशायी हो जाती है। लोगों ने आरोप लगाया कि समय रहते नालों की सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, जिसका खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।

वहीं विधिज्ञ संघ के पूर्व सचिव विपिन सिंह ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शहर में जलजमाव की समस्या नई नहीं है। उन्होंने कहा कि पूर्व की समस्याओं और योजनाओं को ध्यान में रखकर काम नहीं किया जाता, जिसके कारण हर साल बारिश के मौसम में लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
हालांकि बारिश ने जहां नगर परिषद की व्यवस्था की पोल खोल दी, वहीं किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मानसून की पहली अच्छी बारिश से धान की रोपनी में तेजी आने की उम्मीद बढ़ गई है। खेतों में पानी पहुंचने से किसानों को राहत मिली है और कृषि कार्य में गति आने की संभावना जताई जा रही है।
लेकिन शहर की तस्वीर ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पहली बारिश में ही सरकारी कार्यालयों के आसपास जलजमाव की स्थिति बन जा रही है, तो आने वाले दिनों में भारी बारिश के दौरान शहर का हाल क्या होगा?
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