बगहा: जब खतरा बढ़ा और मदद का इंतजार लंबा हुआ तो ग्रामीणों ने खुद ही समाधान तलाश लिया। बगहा पुलिस जिला अंतर्गत नौरंगिया थाना क्षेत्र के सिरसिया गांव में मगरमच्छ के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासनिक पहल का इंतजार किए बिना श्रमदान और चंदा जुटाकर करीब 50 फीट लंबा बांस का चचरी पुल बना दिया।
यह पुल ग्रामीणों के लिए सिर्फ रास्ता नहीं बल्कि मजबूरी में उठाया गया एक बड़ा कदम है। इसी रास्ते से लोग गुलरिया सरेह में खेती-बाड़ी के काम के लिए आते-जाते हैं। लेकिन भपसा नाला में मगरमच्छ की मौजूदगी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। खेतों तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा हो गया था।
आठ दिनों में मगरमच्छ ने किए दो हमले
ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले आठ दिनों में भपसा नाला पार करने के दौरान मगरमच्छ के दो हमले हो चुके हैं। सिरसिया निवासी केदार बैठा को मगरमच्छ नाले में खींच ले गया था। चार दिनों तक चली खोज के बाद उनका शव बरामद हुआ।
वहीं, दूसरी घटना में धान के खेत में सोहनी करने जा रही महिला बासमती देवी पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया। मगरमच्छ ने उसका पैर अपने जबड़े में दबोच लिया। महिला की चीख सुनकर उसके पति जितेंद्र मांझी और आसपास मौजूद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कुदाल व डंडे से शोर मचाते हुए मगरमच्छ को भगाने की कोशिश की। इसके बाद मगरमच्छ महिला का पैर छोड़कर पानी में चला गया।
हमले में महिला के पैर और जांघ में गंभीर चोट आई है, जिसका इलाज जारी है।
ग्रामीणों ने मिलकर बनाया जीवन का रास्ता
पंचायत के बीडीसी उपेंद्र यादव ने बताया कि मगरमच्छ किसानों के लिए खतरा बन चुका था। खेतों में जाना मुश्किल हो गया था, इसलिए ग्रामीणों ने खुद पहल करते हुए चंदा जुटाया और श्रमदान से बांस का पुल तैयार किया।
पुल निर्माण में राजेंद्र यादव, विनोद कुशवाहा, सत्यनारायण यादव, गुड्डू कुमार, कमरुद्दीन मियां सहित कई ग्रामीणों ने सहयोग किया।
लगातार हो रहे हमलों के कारण गांव में डर का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मगरमच्छ को पकड़ने और सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की है। हालांकि मामले में वन विभाग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है।
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