पटना: बिहार की राजनीति में UCC यानी समान नागरिक संहिता को लेकर बहस के बीच केंद्रीय मंत्री और HAM प्रमुख जीतन राम मांझी ने अपना रुख स्पष्ट किया है। मांझी ने UCC के समर्थन में बयान देते हुए ‘तालाब के पानी’ की उपमा के जरिए समान अधिकार की बात कही।
मांझी ने कहा कि UCC के लागू होने में किसी तरह के राजनीतिक दांव-पेच की बात करना उनकी समझ से परे है। उन्होंने इसे संविधान में निहित समानता के अधिकार से जोड़ते हुए अपनी बात रखी।
‘तालाब के पानी’ वाली लाइन से बढ़ी सियासी चर्चा
मांझी ने अपने बयान में कहा कि अब तालाब के पानी पर सभी का अधिकार होगा और इसे उन्होंने बराबरी के अधिकार से जोड़ा। उन्होंने आगे UCC को इसी समानता के संदर्भ में पेश किया।
मांझी के इस बयान के बाद बिहार की सियासत में UCC को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। खास तौर पर NDA के भीतर अलग-अलग सहयोगी दलों के रुख को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है। मांझी का बयान इस बहस में एक नया राजनीतिक बयान जरूर जोड़ता है, लेकिन इससे किसी दल के व्यापक रुख का निष्कर्ष निकालना अलग विषय है।
मोदी सरकार के फैसलों का किया समर्थन
मांझी ने कहा कि सरकार संवैधानिक व्यवस्थाओं को लागू करने के पक्ष में है। उन्होंने UCC के साथ ट्रिपल तलाक और अनुच्छेद 370 जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया तथा कहा कि सरकार किसी व्यक्ति के चेहरे को देखकर काम नहीं करेगी।
फिलहाल UCC को लेकर बिहार में राजनीतिक दलों के अलग-अलग रुख सामने आ रहे हैं। मांझी के बयान ने इस बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
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