काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी अचानक बाढ़ के पांचवें दिन भी हालात गंभीर बने हुए हैं। बाढ़ और भूस्खलन से मरने वालों की संख्या बढ़कर 724 हो गई है, जबकि 2,498 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। हिमालयी क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। इसी बीच भोटे कोशी नदी का जलस्तर और बहाव फिर बढ़ने की सूचना के बाद नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने नदी के आसपास रहने वाले लोगों और राहत टीमों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ से प्रभावित सभी आठ जिलों से शव बरामद किए गए हैं। सबसे अधिक 246 शव चितवन से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट से 165, नवलपरासी वेस्ट से 63, गोरखा से 57, नुवाकोट से 51, धादिंग से 45, तनहुन से 35 और रसुवा से 13 शव बरामद हुए हैं। गोरखा में बरामद अवशेषों में मानव शरीर के कई अंग भी शामिल हैं।
2,498 लोग अब भी लापता
आपदा के बाद जारी लापता लोगों की सूची में आम नागरिकों के साथ-साथ हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी, विदेशी नागरिक, सुरक्षा बलों और सरकारी कर्मचारियों के नाम भी शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 933 लोग हाइड्रोइलेक्ट्रिक परियोजनाओं से और 589 विदेशी नागरिक लापता बताए गए हैं।
बाढ़ ने नेपाल के कई पहाड़ी और नदी किनारे बसे इलाकों में व्यापक तबाही मचाई है। बड़ी संख्या में मकान, दुकानें, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे मलबे में दब गए हैं। कई इलाकों में लोगों को अपने घरों और दुकानों से बची-खुची सामग्री निकालने के लिए कीचड़ और मलबे के बीच तलाश करनी पड़ रही है।
भोटे कोशी का जलस्तर बढ़ने से फिर चिंता
बाढ़ की तबाही से जूझ रहे नेपाल में रविवार को एक बार फिर खतरे की घंटी बज गई। भोटे कोशी नदी के बहाव और शोर में अचानक बढ़ोतरी की सूचना के बाद NDRRMA ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी।
रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत नदी बेसिन से जुड़े इलाकों में स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं को सतर्क रखा गया है। नेपाल-चीन सीमा के नजदीक नदी किनारे रहने वाले समुदायों से जलस्तर पर लगातार नजर रखने और किसी भी खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने को कहा गया है।
18 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मी राहत कार्य में
बचाव और राहत कार्य को तेज करने के लिए नेपाल सरकार ने 18 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के जवान प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने, शवों की तलाश करने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।
राहत एवं चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने के लिए एक सर्जिकल मेडिकल टीम भी तैनात की गई है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा सहायता पहुंचाने के साथ-साथ घायल और बीमार लोगों के उपचार पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत ने भेजी चौथी राहत उड़ान
नेपाल में जारी राहत अभियान के बीच भारत ने भी अपनी सहायता बढ़ा दी है। रविवार को भारत ने काठमांडू के लिए चौथी राहत उड़ान भेजी। इस विमान के जरिए करीब 11 टन राहत सामग्री भेजी गई, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं।
इसके साथ ही भारत ने सुरंगों और दुर्गम स्थानों में खोज एवं बचाव के लिए प्रशिक्षित तकनीकी टीम तथा डीएनए जांच से संबंधित उपकरणों से लैस फोरेंसिक विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इन विशेषज्ञों से आपदा में मारे गए लोगों की पहचान और फोरेंसिक जांच में नेपाली अधिकारियों को मदद मिलेगी।
केरल के 36 लोग सुरक्षित भारत लौटे
नेपाल में बाढ़ के दौरान फंसे केरल के 36 लोगों का एक दल सुरक्षित भारत लौट आया। इन लोगों ने नेपाल सीमा से करीब 100 किलोमीटर का सफर सड़क मार्ग से तय कर भारत में प्रवेश किया। इसके बाद वे गोरखपुर एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से दो अलग-अलग उड़ानों के जरिए केरल लौटे।
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए भी विभिन्न स्तरों पर प्रयास जारी हैं।
अमेरिका ने भी बढ़ाया सहायता का हाथ
आपदा के बीच अमेरिका ने नेपाल के लिए 3.6 मिलियन डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता देने की घोषणा की है। अमेरिकी सहायता में बाढ़ प्रभावित करीब 10 हजार परिवारों के लिए तीन महीने तक की आपातकालीन खाद्य सहायता भी शामिल है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार नेपाल और चीन स्थित अमेरिकी दूतावास अपने नागरिकों की सुरक्षा तथा आपदा राहत प्रयासों में सहयोग के लिए काम कर रहे हैं।
हाइड्रोपावर और सोलर परियोजनाओं को भारी नुकसान
बाढ़ ने नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र को भी बड़ा नुकसान पहुंचाया है। कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं और सोलर प्लांट प्रभावित हुए हैं। त्रिशूली नदी के किनारे स्थित एक सोलर प्लांट का बड़ा हिस्सा बाढ़ के मलबे में दबकर क्षतिग्रस्त हो गया।
हाइड्रोपावर परियोजनाओं से 933 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आने से इन परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
मलबे में अपनों और सामान की तलाश
बाढ़ से प्रभावित गांवों में तबाही का मंजर साफ दिखाई दे रहा है। कई घर और दुकानें कीचड़ और मलबे की मोटी परत के नीचे दब गई हैं। बचे हुए लोग मलबे में अपने जरूरी सामान की तलाश कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने के लिए बहुत कम समय मिला। कई परिवार अपने घर और सामान छोड़कर जान बचाने के लिए भागने को मजबूर हुए।
बचाव अभियान के बीच नई चुनौती
नेपाल में एक ओर जहां सुरक्षाबल और बचाव दल हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं नदियों के जलस्तर में फिर बढ़ोतरी ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नदी किनारे और निचले इलाकों में हाई अलर्ट के बीच लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।
सरकार और राहत एजेंसियों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित आबादी तक राहत पहुंचाना, शवों की पहचान और संभावित नई बाढ़ से लोगों को सुरक्षित रखना है। मौसम और भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले दिनों में राहत एवं बचाव अभियान बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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