पटना: एक चाय की दुकान और दो कप का जिक्र… लेकिन बयान ने ऐसा सियासी ताप बढ़ाया कि बिहार से दिल्ली तक राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दलित समुदाय से जुड़े ‘दो कप’ वाले बयान पर भाजपा ने तीखा हमला बोला है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे समाज में मौजूद कथित जातिगत भेदभाव का मुद्दा बताते हुए राहुल का बचाव किया है।
राहुल के ‘दो कप’ बयान पर BJP का वार
राहुल गांधी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चाय की दुकानों पर कथित तौर पर अलग-अलग कप इस्तेमाल किए जाने का उदाहरण देते हुए जातिगत भेदभाव का मुद्दा उठाया था। उनके बयान के बाद भाजपा नेताओं ने इसे लेकर सवाल खड़े किए।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उन्हें दलितों की चिंता से ज्यादा सत्ता की चिंता है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश हैं।
बिहार में भी भिड़े BJP-कांग्रेस
बिहार में भी इस बयान को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनके राजनीतिक मुद्दों पर सवाल उठाए। वहीं बिहार सरकार के मंत्री अशोक कुमार चौधरी ने पूछा कि अगर इस तरह का भेदभाव लंबे समय से मौजूद रहा है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है।
कांग्रेस का पलटवार- ‘सवाल से क्यों घबराना?’
कांग्रेस नेता उदित राज ने राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दलित समुदाय का व्यक्ति चाय की दुकान या रेस्तरां खोलता है, तो क्या उसे सामाजिक स्तर पर समान स्वीकार्यता मिलती है?
कांग्रेस का तर्क है कि जातिगत भेदभाव पर सवाल उठाना समाज को बांटना नहीं, बल्कि ऐसी असमानताओं पर चर्चा करना है।
अब मुद्दा सिर्फ ‘दो कप’ का नहीं
एक तरफ भाजपा इसे राजनीतिक लाभ के लिए समाज में विभाजन पैदा करने वाला बयान बता रही है, दूसरी तरफ कांग्रेस इसे जातिगत भेदभाव के खिलाफ सवाल बता रही है।
यानी चाय के दो कप का उदाहरण अब बिहार की सियासत में दो अलग-अलग राजनीतिक नैरेटिव का प्रतीक बन गया है—एक तरफ भेदभाव का सवाल, दूसरी तरफ उसके राजनीतिक इस्तेमाल का आरोप।
आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराता है या राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रहता है, इस पर सबकी नजर है।
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