गया: कुछ पल पहले तक गुरपा पहाड़ पर पूजा-पाठ चल रहा था। श्रद्धालु आस्था में डूबे थे, लेकिन अचानक मौसम बदला और तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली ने ऐसा कहर बरपाया कि पूरा पहाड़ चीख-पुकार से गूंज उठा। एक श्रद्धालु की जान चली गई और 20 से अधिक लोग घायल हो गए।
लेकिन इस हादसे की दूसरी तस्वीर भी सामने आई—जहां एंबुलेंस पहाड़ की चोटी तक नहीं पहुंच सकती थी, वहां इंसान ही इंसान के काम आया।
एंबुलेंस नीचे, जिंदगी ऊपर
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती घायलों को अस्पताल पहुंचाने की थी। पहाड़ की ऊंचाई और दुर्गम रास्ते के कारण एंबुलेंस सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकती थी।
फिर शुरू हुआ असली रेस्क्यू ऑपरेशन।
स्थानीय लोग, पुलिसकर्मी और दूसरे श्रद्धालु घायल लोगों को कंधों और पीठ पर उठाकर करीब 1,680 सीढ़ियां नीचे लेकर आए। किसी को दो लोग संभाल रहे थे तो किसी को कई लोग मिलकर नीचे उतार रहे थे।
बिजली गिरी, भगदड़ जैसे हालात बने
बताया गया कि पर्वत की चोटी और संकरी पहाड़ी गुफा के आसपास श्रद्धालु बारिश से बचने के लिए मौजूद थे। इसी दौरान वज्रपात हुआ। तेज आवाज के बाद वहां अफरातफरी मच गई और लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे।
वज्रपात की चपेट में आने वालों में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्गों के साथ ड्यूटी पर तैनात दो पुलिस जवान भी शामिल बताए गए हैं।
तीन अस्पतालों से दौड़ी एंबुलेंस
घटना की सूचना मिलते ही फतेहपुर, टनकुप्पा और वजीरगंज से एंबुलेंस भेजी गईं। नीचे लाए गए घायलों को फतेहपुर सीएचसी पहुंचाया गया। गंभीर हालत वाले कई घायलों को बेहतर इलाज के लिए गया रेफर किया गया।
मौत ने तोड़ा उत्सव का माहौल
हादसे में एक श्रद्धालु की मौत की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। मृतक की पहचान को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अंतर रहा है, इसलिए प्रशासनिक पुष्टि को अंतिम माना जाना चाहिए।
गुरपा सिर्फ पहाड़ नहीं, आस्था का संगम
गुरपा पर्वत हिंदू और बौद्ध दोनों परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं। शनिवार को भी बड़ी संख्या में लोग पर्वत पर मौजूद थे।
एक तरफ कुदरत का कहर, दूसरी तरफ इंसानियत
गुरपा की घटना ने एक साथ दो तस्वीरें दिखाईं—आकाश से मौत बनकर गिरी बिजली और जमीन पर जिंदगी बचाने के लिए दौड़ते लोग।
जब मशीनें पहाड़ की चोटी तक नहीं पहुंच सकीं, तब कंधे ही स्ट्रेचर बने और इंसान ही एंबुलेंस। यही वजह है कि गुरपा हादसे की सबसे बड़ी कहानी सिर्फ वज्रपात नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में एक-दूसरे की जान बचाने की कोशिश भी है।
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