पटना: बिहार में विकास की रफ्तार को अब पत्थर और गिट्टी की कमी नहीं रोक पाएगी। लंबे समय से उत्तर प्रदेश, झारखंड और दूसरे राज्यों से आने वाले निर्माण सामग्री पर निर्भर रहने वाले बिहार ने अब अपनी जमीन से ही जरूरत पूरी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
राज्य सरकार ने गयाजी, नवादा, रोहतास, औरंगाबाद, बांका और शेखपुरा जिले में 44 नए पत्थर खनन क्षेत्रों को मंजूरी दे दी है। करीब 520 एकड़ पहाड़ी क्षेत्र में खनन शुरू होगा, जिससे सरकार को अनुमानित 2300 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
अब तक बिहार में बड़े निर्माण कार्यों के लिए पत्थर और गिट्टी दूसरे राज्यों से मंगाई जाती थी। लंबी दूरी की ढुलाई, टोल और अन्य खर्चों के कारण इसकी कीमत बिहार पहुंचते-पहुंचते काफी बढ़ जाती थी। नई खनन योजना के बाद सरकार को उम्मीद है कि निर्माण सामग्री की लागत कम होगी और आम लोगों के घर बनाने का खर्च भी घट सकता है।
छह जिलों में शुरू होगी खनन की नई कहानी
नए खनन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा 17 जगह नवादा जिले में चिन्हित की गई हैं। इसके अलावा शेखपुरा में 10, गयाजी में 9, रोहतास में 4, औरंगाबाद में 3 और बांका में 1 जगह पर खनन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सरकार ने पर्यावरण और अन्य विभागों से जरूरी मंजूरी मिलने के बाद अब खनन पट्टों की बंदोबस्ती की तैयारी शुरू कर दी है। पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए ई-नीलामी का रास्ता अपनाया जाएगा।
पत्थर से बदलेगी बिहार की तस्वीर?
सरकार का दावा है कि इस फैसले से तीन बड़े फायदे होंगे। पहला, राज्य को हजारों करोड़ रुपए का राजस्व मिलेगा। दूसरा, बाहर से आने वाली गिट्टी और पत्थर की कीमत कम हो सकती है। तीसरा, ई-नीलामी व्यवस्था से खनन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
बिहार में अब पत्थर सिर्फ पहाड़ों से नहीं निकलेगा, बल्कि इससे रोजगार, राजस्व और विकास की नई संभावनाएं भी निकलने की उम्मीद है।