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Jharkhand: 22,970 करोड़ का बजट, खर्च एक रुपया नहीं, झारखंड में आंगनबाड़ी से पोषण तक योजनाएं फाइलों में कैद!

रांची: सरकारी योजनाओं की सबसे बड़ी चुनौती अक्सर पैसों की कमी बताई जाती है, लेकिन झारखंड में महिला एवं बाल...

रांची: सरकारी योजनाओं की सबसे बड़ी चुनौती अक्सर पैसों की कमी बताई जाती है, लेकिन झारखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की कहानी कुछ अलग है। यहां पैसा मौजूद है, बजट भी भारी-भरकम है, लेकिन योजनाएं फाइलों से बाहर निकलने का इंतजार कर रही हैं।

महिला, बाल विकास एवं समाज कल्याण विभाग के पास चालू वित्तीय वर्ष में 22,970 करोड़ रुपये का योजना बजट है, लेकिन 31 मई तक इसमें से खर्च का आंकड़ा शून्य बताया जा रहा है। यानी खजाने में राशि है, मगर उसका लाभ उन लोगों तक नहीं पहुंच पा रहा, जिनके लिए योजनाएं बनाई गई हैं।

सबसे ज्यादा असर आंगनबाड़ी व्यवस्था पर पड़ा है। राज्य के हजारों आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों का पोषण, महिलाओं की सुविधाएं और केंद्रों के संचालन से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

फाइलों में अटका ‘सक्षम आंगनबाड़ी’ का सपना

राज्य के 16,675 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए 166.75 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए। योजना के तहत केंद्रों में एलईडी टीवी, वाटर प्यूरीफायर और बच्चों के लिए खेल सामग्री उपलब्ध कराई जानी थी।

लेकिन जमीन पर काम शुरू होने से पहले ही मामला टेंडर प्रक्रिया में फंस गया। अब विभाग को उम्मीद है कि जुलाई के अंत तक प्रक्रिया पूरी होगी और अगस्त से सामग्री पहुंचाने का काम शुरू हो सकेगा।

पोषण की थाली भी इंतजार में

0 से 6 साल तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए चल रही पोषण 2.0 योजना भी पिछले चार महीने से प्रभावित है।

टेक होम राशन की व्यवस्था रुकी हुई है। इसका असर सीधे उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाले पोषण आहार पर निर्भर हैं।

सेविका-सहायिकाओं का मानदेय भी अटका

राज्य की 38,432 आंगनबाड़ी सेविकाएं और इतनी ही सहायिकाएं मानदेय का इंतजार कर रही हैं। सेविकाओं और सहायिकाओं का भुगतान लंबे समय से लंबित होने से उनकी आर्थिक परेशानी बढ़ गई है।

विभाग का कहना है कि केंद्र से राशि प्राप्त हो चुकी है और जुलाई के अंत तक भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य है।

कहां फंस रहा है पूरा सिस्टम?

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, एसएनए स्पर्श प्रणाली लागू होने के कारण भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी अड़चनें आई हैं। अब सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को इस प्रणाली से जोड़ा जा रहा है और बिल प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा किया जा रहा है।

विभागीय सचिव उमाशंकर सिंह का दावा है कि अगस्त से सक्षम आंगनबाड़ी, पोषण कार्यक्रम और अन्य योजनाएं फिर से रफ्तार पकड़ लेंगी।

लेकिन बड़ा सवाल यही है—जब पैसा उपलब्ध था, तो जरूरतमंदों तक पहुंचने में इतना समय क्यों लगा? जिन बच्चों की पोषण थाली और जिन महिलाओं की मदद के लिए योजनाएं बनी थीं, उन्हें अब भी फाइलों के खुलने का इंतजार है।

Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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