रांची: राजधानी रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रांतीय कार्यालय पर हुए पेट्रोल बम हमले को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ा खुलासा किया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच में यह मामला अब सिर्फ स्थानीय हमला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय आतंकी साजिश के रूप में सामने आ रहा है।
मामले में गिरफ्तार मुख्य आरोपी अमन अंसारी और सयाम सुजान से हुई पूछताछ में चौंकाने वाली जानकारी मिली है। दोनों आरोपियों ने स्वीकार किया है कि उन्हें पाकिस्तान और दुबई में बैठे हैंडलर्स से लगातार निर्देश मिल रहे थे। NIA के अनुसार, यह पूरा हमला एक संगठित नेटवर्क के जरिए प्लान किया गया था।
ऑनलाइन ट्रेनिंग और डिजिटल नेटवर्क से जुड़ा खेल
जांच में सामने आया है कि आरोपियों को पेट्रोल बम बनाने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग ऑनलाइन दी गई थी। इसके लिए वीडियो कॉलिंग एप्स जैसे बॉटिम और व्हाट्सएप का इस्तेमाल किया गया। इन्हीं माध्यमों से उन्हें हमले की पूरी योजना और टारगेट समझाया गया।
एजेंसियों को शक है कि आरोपी एक ऐसे आतंकी मॉड्यूल से जुड़े हैं, जो “तेहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान” नाम से सक्रिय बताया जा रहा है। इसमें विदेशी खुफिया नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
हमले के बाद भागने की पूरी प्लानिंग
NIA जांच में यह भी सामने आया है कि हमले के बाद आरोपी बिहार के रास्ते दिल्ली भागने की योजना बना रहे थे। इसके लिए उन्होंने बोकारो और कोडरमा रूट का इस्तेमाल करने की तैयारी की थी।
एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि दिल्ली में उनका संपर्क किससे होना था और झारखंड में इन्हें किसने शरण दी थी।
फंडिंग और स्लीपर सेल की जांच तेज
सुरक्षा एजेंसियां अब आरोपियों के बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि इस साजिश के लिए फंडिंग कहां से आई।
राज्य में सक्रिय संभावित स्लीपर सेल और उनके नेटवर्क को भी खंगाला जा रहा है ताकि पूरे मॉड्यूल का खुलासा किया जा सके।
एटीएस ने तैयार की 61 संदिग्धों की सूची
इधर झारखंड एटीएस ने भी राज्य में आतंकी गतिविधियों पर निगरानी तेज कर दी है। एजेंसी ने ISIS और अलकायदा से जुड़े कुल 61 संदिग्धों की सूची तैयार की है, जिसे सभी जिलों के एसपी को भेजा गया है।
इस सूची में 12 संदिग्ध ISIS और 49 अलकायदा से जुड़े बताए जा रहे हैं। सभी पर कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।
सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
पूरे मामले के सामने आने के बाद झारखंड में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया गया है। एजेंसियां अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए लगातार छापेमारी और जांच में जुटी हैं।
फिलहाल यह मामला राज्य में सबसे बड़े आतंकी नेटवर्क कनेक्शन वाले मामलों में से एक माना जा रहा है, जिसकी परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं।
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