रांची: रांची में इन दिनों भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तहत जो वोटर गणना फॉर्म बांटे जा रहे हैं, उसे लेकर लोगों में तेजी से भ्रम और गलतियां सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि लोग इसे सामान्य फॉर्म समझकर लापरवाही कर रहे हैं, जबकि यह सीधे आपके वोटर रिकॉर्ड और पहचान से जुड़ा अहम दस्तावेज है।
अधिकारियों के अनुसार फॉर्म भरते समय सबसे ज्यादा गलती वहीं हो रही है जहां लोग दो कॉपी मिलने के बाद दोनों ही बीएलओ को जमा कर दे रहे हैं। जबकि नियम साफ है कि एक कॉपी बीएलओ को दी जाएगी और दूसरी कॉपी मतदाता को अपने पास पावती के रूप में सुरक्षित रखनी है। यही छोटी सी चूक आगे चलकर दस्तावेजी परेशानी का कारण बन सकती है।
फॉर्म के ऊपरी हिस्से में बीएलओ की जानकारी पहले से भरी होती है, लेकिन असली जिम्मेदारी मतदाता की होती है जिसमें नाम, पता, जन्मतिथि और अन्य विवरण बिल्कुल सही और मिलान के अनुसार भरना जरूरी है। जरा सी स्पेलिंग गलती या गलत जानकारी भी आपके रिकॉर्ड को प्रभावित कर सकती है।
निर्वाचन आयोग ने उम्र के आधार पर दस्तावेजों के नियम भी सख्त किए हैं। 1 जुलाई 1987 से पहले जन्मे लोगों को जन्मतिथि और जन्म स्थान का प्रमाण देना होगा, 1987 से 2004 के बीच जन्मे लोगों को अपने साथ माता या पिता का प्रमाण देना जरूरी है, जबकि 2004 के बाद जन्मे मतदाताओं को स्वयं के साथ माता-पिता दोनों के दस्तावेज देने होंगे।
जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक दस्तावेज और सरकारी रिकॉर्ड जैसे कागजात ही मान्य माने जा रहे हैं।
अधिकारियों का साफ संदेश है कि यह फॉर्म सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि मतदाता सूची का आधार है, इसलिए इसे जल्दबाजी या गलत जानकारी के साथ भरना आने वाले चुनावों में बड़ी समस्या खड़ी कर सकता है।
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