ओडिशा/झारखंड: झारखंड-ओडिशा सीमा पर सोमवार तड़के उस वक्त हड़कंप मच गया जब क्योंझर जिले के चंपुआ थाना क्षेत्र में पुलिस और कुख्यात अंतरराज्यीय चोर मोहम्मद नफीस के बीच मुठभेड़ हो गई। यह घटना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी—जंगल, हथियार और अचानक शुरू हुई गोलियों की बौछार।
पुलिस के अनुसार, नफीस को चोरी के एक मामले में बरामदगी के लिए जंगल ले जाया जा रहा था। लेकिन तभी उसने पहले से छिपाकर रखी गई देसी बंदूक निकाल ली और पुलिस टीम पर दो राउंड फायरिंग कर दी। अचानक हुए हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई।
पुलिस ने भी तुरंत मोर्चा संभाला और जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई, जिसमें नफीस के दाहिने घुटने में गोली लग गई। घायल होकर वह मौके पर गिर पड़ा और पुलिस ने उसे दोबारा काबू में ले लिया।
जंगल में छिपा था ‘खतरनाक राज’
घटनास्थल से पुलिस ने एक देसी बंदूक भी बरामद की है। बताया जा रहा है कि यह वही हथियार था जिसे नफीस ने पहले से जंगल में छिपा रखा था ताकि मौका मिलते ही भाग सके या हमला कर सके।
चोरी का सामान और 30+ मामलों का नेटवर्क
मोहम्मद नफीस कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि झारखंड-ओडिशा बॉर्डर का कुख्यात नाम बताया जा रहा है। उसके खिलाफ 30 से अधिक चोरी और डकैती के मामले दर्ज हैं।
क्योंझर और मयूरभंज जैसे इलाकों में उसका नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था।
भागने की कोशिश और फिर एनकाउंटर
पुलिस के मुताबिक, बरामदगी के दौरान नफीस ने जंगल का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने घेराबंदी कर दी। इसी दौरान फायरिंग शुरू हो गई और पूरा इलाका गोलियों की आवाज से गूंज उठा
अस्पताल में इलाज, पुलिस जांच तेज
घायल नफीस को पहले चंपुआ अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे क्योंझर जिला अस्पताल रेफर किया गया। उसकी हालत पर पुलिस लगातार नजर रख रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ एक चोर की गिरफ्तारी थी या इसके पीछे एक बड़ा अंतरराज्यीय चोरी गैंग सक्रिय है? पुलिस अब उसके पूरे नेटवर्क, साथियों और छिपाए गए माल की तलाश में जुट गई है।
जंगल की इस मुठभेड़ ने एक बार फिर साबित कर दिया है—सीमा पर अपराधी कितने भी शातिर क्यों न हों, कानून का शिकंजा देर से सही लेकिन कसता जरूर है।
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