पटना: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के 30वें स्थापना दिवस के मौके पर बिहार की राजनीति में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। एक तरफ पूरे राज्य में पार्टी कार्यकर्ता जश्न मना रहे थे, वहीं दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव परिवार के साथ 10 दिन के यूरोप दौरे पर निकल गए। इस बीच राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं के नाम एक मजबूत राजनीतिक संदेश जारी किया।
लालू यादव ने अपने संदेश में साफ कहा कि राजद सिर्फ चुनाव लड़ने वाली पार्टी नहीं है, बल्कि यह गरीबों, पिछड़ों, दलितों और वंचितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाला एक आंदोलन है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और तानाशाही की राजनीति के जरिए लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे इस परिस्थिति को समझें और बिना समय गंवाए संघर्ष के लिए तैयार रहें। लालू ने यह भी कहा कि राजद का विकास मॉडल केवल बड़े प्रोजेक्ट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के आखिरी व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना ही पार्टी का असली उद्देश्य है।
इधर, तेजस्वी यादव का स्थापना दिवस के दौरान यूरोप दौरे पर जाना सियासी बहस का मुद्दा बन गया है। सत्तापक्ष लगातार उन पर निशाना साध रहा है और सवाल उठा रहा है कि जब विधानसभा सत्र चल रहा है, तब नेता प्रतिपक्ष विदेश यात्रा पर क्यों हैं। बिहार सरकार के मंत्री जमा खान ने भी इसे लेकर तंज कसा।
हालांकि तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया के जरिए अपने पिता लालू यादव को “गरीबों का मसीहा” बताते हुए एक भावनात्मक कविता साझा की और पार्टी की विचारधारा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने लिखा कि लालू यादव सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं, जिन्होंने शोषित और वंचित वर्ग को आवाज दी।
राज्यभर में RJD का स्थापना दिवस बड़े स्तर पर मनाया गया। पटना से लेकर जिला मुख्यालयों तक कार्यक्रम आयोजित हुए, जहां नेताओं ने सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द के संकल्प को दोहराया। पार्टी नेताओं ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने की अपील की।
बांकीपुर, गयाजी और बिहारशरीफ जैसे कई स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में पार्टी के नेताओं ने कहा कि राजद की असली ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने 30 साल के सफर में पार्टी को मजबूत बनाया है।
कुल मिलाकर, स्थापना दिवस के मौके पर एक तरफ लालू यादव का आक्रामक राजनीतिक संदेश सामने आया, तो दूसरी तरफ तेजस्वी यादव की विदेश यात्रा ने बिहार की सियासत को गरमा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश में जुटे हैं।
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