पटना: बिहार की राजनीति में बयानबाजी एक बार फिर निजी मोड़ लेती दिखी। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा के ‘NRI नेता’ वाले बयान पर पलटवार करते हुए उनके परिवार का जिक्र कर दिया। तेजस्वी ने कहा कि संजय झा की बेटियां विदेश में पढ़ी हैं, लेकिन वह खुद बिहार के हैं और बिहार में ही रहेंगे।
तेजस्वी का बयान सामने आते ही सियासी बहस का मुद्दा सिर्फ नेताओं की राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार, विदेश में पढ़ाई और बिहार से जुड़ाव तक पहुंच गया।
‘हम बिहार के हैं और यहीं रहेंगे’
तेजस्वी ने कहा कि बिहार उनकी जन्मभूमि है और वह हमेशा बिहार के ही रहेंगे। इसी दौरान उन्होंने संजय झा के विदेश जाने और उनकी बेटियों के विदेश में पढ़ने का जिक्र करते हुए कहा कि वह इस तरह की व्यक्तिगत बातें नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी बिहार के प्रति प्रतिबद्धता पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
तेजस्वी का जोर इस बात पर था कि बिहार में रहने और बिहार से जुड़े रहने की पहचान किसी के विदेश जाने से तय नहीं होती।
NRI वाले बयान पर पलटवार
दरअसल, संजय झा के एक बयान को लेकर तेजस्वी ने जवाब दिया। इसी क्रम में उन्होंने JDU नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि वह बिहार के हैं और यहीं रहेंगे।
तेजस्वी ने यह भी आरोप लगाया कि संजय झा लंबे राजनीतिक कार्यक्रम के तहत JDU में आए और उनके आने से नीतीश कुमार को राजनीतिक नुकसान हुआ। हालांकि, ये तेजस्वी यादव के राजनीतिक आरोप हैं।
निजी टिप्पणी ने बढ़ाई सियासी गर्मी
इस बयान का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा संजय झा की बेटियों की विदेश में पढ़ाई का जिक्र रहा। आमतौर पर चुनावी राजनीति में नीतियों और सरकार के कामकाज पर वार होता है, लेकिन इस बार बहस परिवार और निजी जीवन के संदर्भ तक पहुंच गई।
यही वजह है कि बयान को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
राघोपुर में बाढ़ का मुद्दा भी उठाया
तेजस्वी यादव ने अपने विधानसभा क्षेत्र राघोपुर का दौरा कर गंगा के बढ़े जलस्तर और बाढ़ की स्थिति का जायजा भी लिया। उन्होंने प्रभावित लोगों से बातचीत की और सरकार से राहत व्यवस्था मजबूत करने की मांग की।
उन्होंने नावों की पर्याप्त व्यवस्था, लोगों और मवेशियों की सुरक्षा तथा प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की मांग उठाई।
अब पलटवार का इंतजार
एक तरफ राघोपुर में तेजस्वी बाढ़ और राहत व्यवस्था को मुद्दा बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ उनके संजय झा पर निजी टिप्पणी वाले बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि JDU और संजय झा इस बयान का क्या जवाब देते हैं—क्योंकि लड़ाई अब सिर्फ नेताओं के बयानों की नहीं, बल्कि ‘बिहार से कौन कितना जुड़ा है’ की सियासी बहस तक पहुंचती दिख रही है।
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