बक्सर: बड़ी नहर पुल पर एक व्यक्ति को बचाने के लिए शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन देखते ही देखते विवाद में बदल गया। ज्योति प्रकाश चौक के पास नहर में डूबे करीब 40 वर्षीय व्यक्ति को निकालने की कोशिश के दौरान हंगामा, महिला पुलिसकर्मी से कथित बदसलूकी, पुलिसकर्मियों से धक्का-मुक्की और जिलाधिकारी की सरकारी गाड़ी रोकने की कोशिश के आरोप सामने आए हैं।
मामले में नगर थाना पुलिस ने छोटू बाबा समेत उसके साथियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। पुलिस अब वायरल वीडियो और घटनास्थल से जुड़े अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
रेस्क्यू चल रहा था… तभी पहुंच गए युवक
पुलिस के मुताबिक, 3 सितंबर की शाम करीब चार बजे बड़ी नहर पुल से एक व्यक्ति के नहर में कूदने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। पुल पर देखते ही देखते भीड़ जुट गई और व्यक्ति को तलाशने के लिए बचाव अभियान शुरू हुआ।
इसी बीच चारपहिया वाहन से चार-पांच युवक मौके पर पहुंचे। इनमें एक युवक को छोटू बाबा के नाम से बुलाया जा रहा था।
पुलिस का आरोप है कि युवकों ने बचाव अभियान के दौरान शोर-शराबा किया और सरकारी कार्य में बाधा डालने की स्थिति पैदा की।
नहर से बाहर आया व्यक्ति, लेकिन नहीं बची जान
बाद में सरकारी गोताखोर की मदद से व्यक्ति को नहर से बाहर निकाला गया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद युवकों ने उसे अपनी गाड़ी में बैठाया और अस्पताल ले गए।
पुलिस ने उनका पीछा करने की कोशिश की, लेकिन वे मौके से निकल गए। बाद में अस्पताल में चिकित्सकों ने व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया।
वायरल वीडियो ने बढ़ाया विवाद
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो भी चर्चा में है। पुलिस के आवेदन में एक इंस्टाग्राम अकाउंट से पोस्ट किए गए वीडियो का उल्लेख किया गया है।
पुलिस के अनुसार, वीडियो में दो युवक महिला पुलिसकर्मी से बहस करते दिखाई दे रहे हैं। इसी घटनाक्रम को पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा और मौके पर हुए विवाद से जोड़ते हुए FIR में शामिल किया है।
पुलिस से धक्का-मुक्की का आरोप
पुलिस का आरोप है कि भीड़ और युवकों को हटाने के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस बल ने हस्तक्षेप कर भीड़ को हटाया।
इसी दौरान जिलाधिकारी की सरकारी गाड़ी को रोकने की कोशिश किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
यानी एक तरफ नहर में डूबे व्यक्ति को बचाने की जद्दोजहद चल रही थी, तो दूसरी तरफ मौके पर पुलिस और युवकों के बीच विवाद ने माहौल गरमा दिया।
छोटू बाबा की कहानी पुलिस से अलग
हालांकि, छोटू बाबा ने पुलिस के आरोपों को अलग तरीके से बताया है। उसका कहना है कि वे लोग वहां से गुजर रहे थे और व्यक्ति को नहर में गिरता देखकर उसके साथी ने तुरंत उसे बाहर निकालने की कोशिश की।
उसके मुताबिक, व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के बाद महिला पुलिसकर्मी से गाड़ी के चालान को लेकर विवाद हुआ। छोटू बाबा का दावा है कि जिलाधिकारी की गाड़ी वहां से गुजरने पर वह अपनी शिकायत बताना चाहता था, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उसे वहां से हटा दिया।
अब वीडियो बताएगा असली कहानी?
पुलिस ने इस मामले में सहायक अवर निरीक्षक मुकेश कुमार यादव के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज की है। मामले की जांच कंचन बाला को सौंपी गई है।
पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो, घटनास्थल के उपलब्ध फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
बड़ा सवाल
रेस्क्यू ऑपरेशन के बीच आखिर ऐसा क्या हुआ कि मदद करने पहुंचे युवकों पर ही सरकारी काम में बाधा और पुलिस से धक्का-मुक्की जैसे आरोप लग गए?
अब पुलिस जांच और वीडियो फुटेज से इस सवाल का जवाब सामने आने का इंतजार है।
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