रांची: राजधानी रांची का 335 साल पुराना ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला इस बार रिकॉर्ड टेंडर राशि के कारण चर्चा में है। वर्ष 2026 में मेले का ठेका 2 करोड़ 27 लाख 21 हजार 112 रुपये में दिया गया है, जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे अधिक है। टेंडर राशि में इस बड़ी बढ़ोतरी का सीधा असर मेले में दुकान लगाने वाले छोटे और बड़े व्यापारियों पर पड़ा है।
इस वर्ष 16 जुलाई से शुरू हुए 10 दिवसीय मेले का संचालन पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर निवासी राजेश चंद्रा की फर्म आरएस इंटरप्राइजेज को मिला है। पिछले वर्षों की तुलना करें तो 2023 में टेंडर राशि 75 लाख रुपये थी, 2024 में 1.92 करोड़ रुपये, 2025 में घटकर 51.51 लाख रुपये रही, जबकि इस बार यह बढ़कर 2.27 करोड़ रुपये पहुंच गई है।
किराये में जबरदस्त उछाल
टेंडर राशि बढ़ने के साथ ही मेले में दुकान, फूड स्टॉल, झूला और पार्किंग का किराया भी काफी बढ़ गया है। अलग-अलग स्थान और आकार के अनुसार स्टॉल का किराया 100 से 500 रुपये प्रति फीट प्रतिदिन तय किया गया है। कई छोटे दुकानदारों से रोजाना 1000 से 5000 रुपये तक किराया लिया जा रहा है, जबकि बड़े झूले और दुकानों के लिए 10 दिनों का किराया 80 हजार से 3 लाख रुपये तक पहुंच गया है।
छोटे व्यापारियों की बढ़ी चिंता
मेले में वर्षों से दुकान लगाने वाले व्यापारियों का कहना है कि इस बार किराया अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। उनका कहना है कि इतनी अधिक लागत में मुनाफा निकालना मुश्किल हो जाएगा। कई दुकानदारों को मजबूरी में अपने सामान और खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़ाने पड़े हैं, जिसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ रहा है।
सुरक्षा और सुविधाओं का दावा
मेला प्रबंधन का कहना है कि इस बार श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए सुविधाओं में सुधार किया गया है। पेयजल, शौचालय, सफाई, पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। मेले की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक निजी एजेंसी को सौंपी गई है, जबकि पुलिस और प्रशासन भी पूरी तरह तैनात हैं।
मंदिर समिति के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई है और किराया तय मानकों के अनुसार ही लिया जा रहा है।
मेले में महंगाई की चर्चा
रिकॉर्ड टेंडर राशि और बढ़े हुए किराये के कारण इस बार जगन्नाथपुर रथ मेला सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि महंगाई और व्यापारिक दबाव को लेकर भी चर्चा का केंद्र बन गया है। छोटे व्यापारियों के लिए यह मेला अब चुनौती बनता जा रहा है, जबकि आम लोगों की जेब पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है।
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