नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच खुली बहस को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर पीएम मोदी को सार्वजनिक मंच पर बहस की चुनौती दी। उन्होंने कहा कि मोदी जी अपनी पसंद का मंच और जगह तय कर लें, यहां तक कि बहस के लिए निर्णायक भी खुद चुन लें। दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पलटवार करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष को संसद चलने देना चाहिए।
राहुल गांधी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर करीब डेढ़ मिनट का वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने कहा कि उनकी चुनौती दिए हुए 24 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री विपक्ष पर देश विरोधी होने का आरोप लगाते हैं, इसलिए इस मुद्दे पर खुली बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी किसी भी मंच और स्थान का चयन कर सकते हैं। बहस में मीडिया और देश के युवा भी मौजूद रहें, ताकि देश के सामने दोनों पक्ष अपनी बात रख सकें।
विदेशी कनेक्शन से लेकर US डील तक पर बहस की मांग
राहुल गांधी ने बहस के लिए कई मुद्दे भी गिनाए। उन्होंने सवाल उठाया कि देश विरोधी कौन है और विदेशी ताकतों से किसका संबंध है? उन्होंने कहा कि बहस में देश के वित्तीय सिस्टम, वित्तीय ढांचे, भारत-अमेरिका डील, अडाणी मामले और एपस्टीन से जुड़े मुद्दों पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
राहुल ने सवाल किया कि अमेरिका के साथ डील किस तरह हुई, इतनी जल्दी क्यों हुई और इसमें कैबिनेट को जानकारी क्यों नहीं दी गई? उन्होंने अडाणी मामले को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, ये सभी सवाल और आरोप राहुल गांधी की ओर से उठाए गए हैं। इन पर सरकार या संबंधित पक्ष का पक्ष भी सामने आना जरूरी है।
राहुल गांधी ने बहस के लिए निर्णायक चुनने का अधिकार भी प्रधानमंत्री को देने की बात कही। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मोदी चाहें तो आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को भी निर्णायक बनाया जा सकता है। राहुल का कहना है कि बहस किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि मीडिया और देश के युवाओं की मौजूदगी में होनी चाहिए।
45 मानहानि मुकदमों का भी किया जिक्र
वीडियो में राहुल गांधी ने अपने खिलाफ दर्ज मानहानि के मामलों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि उनके ऊपर करीब 45 मानहानि के मुकदमे हैं। राहुल ने कहा कि दूसरे मुद्दों पर उनके खिलाफ मानहानि के केस किए गए हैं, लेकिन विदेशी कनेक्शन से जुड़े सवालों पर बहस को लेकर ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भी खुलकर चर्चा होनी चाहिए।
अपने वीडियो के आखिर में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को दिवाली की शुभकामनाएं देते हुए फिर से बहस के लिए आमंत्रित किया।
अमित शाह का पलटवार- नकली संसद बनाकर असली संसद का मखौल उड़ाया
राहुल गांधी की चुनौती के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने भी विपक्ष पर निशाना साधा। छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर में उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है। सरकार विशेष सत्र बुलाकर SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर भी चर्चा करने को तैयार है।
शाह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने नकली संसद बनाकर असली संसद का मखौल उड़ाया और चर्चा का नाटक किया। उन्होंने कहा कि अगर राहुल गांधी को किसी मुद्दे पर चर्चा करनी है तो उन्हें संसद में आकर देश की जनता के सामने अपनी बात रखनी चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि केवल हाथ में संविधान लेकर घूमने से संविधान के प्रति समर्थन साबित नहीं होता, बल्कि आचरण भी संवैधानिक होना चाहिए। उन्होंने विपक्ष से संसद की कार्यवाही चलने देने की अपील की।
बहस के मुद्दे अलग, सियासी टकराव एक
इस पूरे विवाद में दोनों नेताओं की ओर से बहस के अलग-अलग मुद्दे सामने आए हैं। राहुल गांधी प्रधानमंत्री के साथ विदेशी कनेक्शन, वित्तीय व्यवस्था, भारत-अमेरिका डील और अडाणी मामले पर खुली सार्वजनिक बहस चाहते हैं। वहीं अमित शाह ने SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संसद के भीतर चर्चा की पेशकश की है।
इससे पहले भी राहुल गांधी कई मौकों पर प्रधानमंत्री को राफेल सौदे और भ्रष्टाचार समेत अलग-अलग मुद्दों पर बहस की चुनौती दे चुके हैं। अब एक बार फिर उनकी चुनौती के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच आमने-सामने सार्वजनिक बहस हो पाएगी या फिर यह मुद्दा भी संसद और सोशल मीडिया पर जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रहेगा।
ये खबर भी पढ़े: दिसंबर में पटना से नालंदा तक सजेगा खेलों का मैदान, बिहार राज्य खेल 2026 में 20 से अधिक विधाओं की होगी भिड़ंत!