पटना: बिहार की राजनीति में भरत तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार सवाल सिर्फ मुठभेड़ और उसके बाद हुई राजनीति का नहीं, बल्कि उस परिवार को मिली कथित आर्थिक सहायता का है, जिसके नाम पर चुनावी मंचों से बड़े-बड़े दावे किए जाने की बात सामने आई है।
पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने दावा किया है कि भरत तिवारी के परिवार को सरकार की ओर से एक रुपये की भी आर्थिक मदद नहीं मिली। उन्होंने परिवार को 50 लाख रुपये दिए जाने के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इतनी बड़ी राशि दी गई है तो उसका प्रमाण भी सामने आना चाहिए।
सियासत के बीच परिवार का सवाल सबसे बड़ा
पप्पू यादव के मुताबिक, भरत तिवारी की पत्नी और मां खुद कह चुकी हैं कि परिवार को किसी तरह की आर्थिक सहायता नहीं मिली। सांसद ने इसी आधार पर राजनीतिक दलों और नेताओं पर निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस परिवार को मदद की जरूरत थी, उसकी सहायता करने के बजाय उसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बना दिया गया। पप्पू यादव ने कहा कि पहले परिवार से किए गए दावों का सच सामने आना चाहिए और यदि मदद नहीं की गई तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों को माफी मांगनी चाहिए।
50 लाख का दावा या सिर्फ सियासी बयान?
भरत तिवारी के परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता दिए जाने का मुद्दा पहले भी राजनीतिक बहस का हिस्सा रहा है। अब पप्पू यादव के बयान ने इस पुराने विवाद को फिर हवा दे दी है।
लेकिन इस पूरे विवाद के बीच असली सवाल यही है—क्या परिवार को वास्तव में 50 लाख रुपये मिले? अगर मिले तो किस मद में, किस तारीख को और किस माध्यम से भुगतान किया गया?
जब तक इन सवालों का आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आता, तब तक 50 लाख रुपये की सहायता को लेकर राजनीतिक दावे और प्रतिदावे जारी रहने की संभावना है।
शहीद के परिवार को राजनीति से दूर रखिए
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि भरत तिवारी के परिवार और उनकी मौत को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि किसी परिवार के दुख को चुनावी फायदे का मुद्दा बनाने के बजाय उसके साथ खड़ा होना चाहिए।
उनके बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले से चल रही राजनीतिक खींचतान को और तेज कर दिया है।
नेहा बोरा प्रकरण पर भी सरकार पर हमला
पप्पू यादव ने विरोध प्रदर्शन के दौरान नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना को लेकर भी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और विरोध प्रदर्शनों से जुड़े मामलों को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
इस दौरान उन्होंने कई गंभीर आरोप लगाए, हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
जूता कांड से लेकर भरत तिवारी तक—पप्पू यादव के निशाने पर सरकार
पप्पू यादव पर जूता फेंकने के आरोपी सुमित गिरि और हैप्पी शर्मा के अपने गांव पहुंचने पर स्वागत किए जाने का मामला भी अब राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा बन चुका है। दोनों के स्वागत का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाओं को भी साझा किया।
ऐसे में भरत तिवारी मामला सिर्फ एक कथित एनकाउंटर की कहानी तक सीमित नहीं रह गया है। अब लड़ाई इस बात पर है कि परिवार को क्या मिला, किसने दिया और चुनावी राजनीति में इस परिवार की कहानी का इस्तेमाल किस तरह हुआ।
फिलहाल पप्पू यादव के आरोपों के बाद निगाहें सरकार और संबंधित पक्ष के जवाब पर टिकी हैं। यदि 50 लाख रुपये की सहायता का दावा सही है, तो उसका आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आना इस राजनीतिक विवाद को खत्म करने की दिशा में सबसे ठोस कदम हो सकता है।
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