लखीसराय: जलस्रोतों पर कब्जा कर बैठे अतिक्रमणकारियों के खिलाफ अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। समाहरणालय के मंत्रणा कक्ष में अपर समाहर्ता नीरज कुमार की अध्यक्षता में हुई जल-जीवन-हरियाली अभियान की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को साफ संदेश दिया गया—जल निकाय कागजों में नहीं, जमीन पर भी सुरक्षित दिखने चाहिए।
अपर समाहर्ता ने सभी अंचलाधिकारियों को निर्देश दिया कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज हर तालाब, पोखर और अन्य जल निकाय की पहचान कराई जाए। जहां कब्जा मिला, वहां नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाए। इसके लिए अधिकारियों को एक महीने की डेडलाइन दी गई है।
राजस्व कर्मचारी उतरेंगे मैदान में, होगी स्थल जांच
प्रभारी पदाधिकारी राजस्व शाखा शशि कुमार ने बताया कि अंचलाधिकारी राजस्व कर्मचारियों के माध्यम से जलस्रोतों की स्थल जांच कराएंगे। सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि मौके पर जाकर यह देखा जाएगा कि जल निकाय की वास्तविक स्थिति क्या है।
सार्वजनिक कुओं की भी होगी गिनती और पहचान, ताकि उनकी स्थिति का रिकॉर्ड तैयार कर संरक्षण की कार्रवाई की जा सके।
395 कुओं का कायाकल्प, अब बारिश का पानी भी सहेजने की तैयारी
पंचायती राज विभाग के अनुसार जिले में अब तक 395 कुओं का जीर्णोद्धार कराया जा चुका है। अब वर्षा जल संचयन से जुड़े कामों को भी गति दी जा रही है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि बारिश का पानी बहकर बर्बाद होने के बजाय जमीन में पहुंचे और भू-जल स्तर को बनाए रखने में मदद करे।
चार विभागों की जिम्मेदारी तय
बैठक में ग्रामीण कार्य विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग और पंचायती राज विभाग के अधिकारियों से अभियान की प्रगति की जानकारी ली गई। सभी विभागों को अपने-अपने लक्ष्य समय पर पूरा करने और नियमित प्रगति रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन की एक महीने की डेडलाइन अब सबसे बड़ा टेस्ट है। जल निकायों पर कब्जे के खिलाफ कार्रवाई कितनी जमीन पर उतरती है, इसकी तस्वीर अगले एक महीने में साफ होगी।
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