भारत/नेपाल: छोचेन नदी में बना इम्पैक्ट क्रेटर अब भले ही राहत का संकेत दे रहा हो, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। क्रेटर में जमा अधिकांश पानी बहकर निकल चुका है और निचले तटीय इलाकों में नदी का बहाव सामान्य बताया गया है। इसी बीच क्रेटर के आसपास मौजूद हिमचट्टानों और बड़े हिमखंडों के टूटने की आशंका ने नई चिंता बढ़ा दी है। चीन ने नेपाल को संभावित खतरे को लेकर चेतावनी दी है।
चीनी सरकारी मीडिया सीसीटीवी न्यूज ने चीन के जल संसाधन मंत्रालय के हवाले से बताया कि तिब्बत के ग्यिरोंग (केरुंग) क्षेत्र में मलबे वाली बाढ़ से जुड़े संभावित जोखिमों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। मंत्रालय की ओर से क्षेत्र में हालात का आकलन जारी है।
ड्रोन तस्वीरों में दिखी राहत, लेकिन खतरा नहीं हुआ खत्म
मंगलवार सुबह नेपाली समयानुसार 5:45 बजे लिए गए ड्रोन चित्रों में छोचेन नदी के इम्पैक्ट क्रेटर में जमा अधिकांश पानी निकलता पाया गया। पानी कम होने के बाद निचले तटीय क्षेत्रों में नदी का बहाव भी सामान्य स्थिति में लौट आया है।
हालांकि, क्रेटर के आसपास मौजूद बड़े हिमखंड और हिमचट्टानें अब भी चिंता का कारण हैं। इनके अचानक टूटने की स्थिति में नदी में फिर भारी मात्रा में पानी या मलबा आने का खतरा पैदा हो सकता है।
14 हिमतालों पर भी चीन की पैनी नजर
चीन के जल संसाधन मंत्रालय के मुताबिक ग्यिरोंग त्सांगपो नदी बेसिन में चिन्हित 14 हिमतालों के जलस्तर वाले क्षेत्रों में रिमोट-सेंसिंग तस्वीरों के तुलनात्मक विश्लेषण के दौरान कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं मिला है। सभी हिमताल फिलहाल स्थिर स्थिति में बताए गए हैं।
नेपाल सरकार को सौंपी गई अहम रिपोर्ट
चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट को नेपाल स्थित चीनी दूतावास ने नेपाल के मौसम विभाग और बाढ़ पूर्वानुमान महाशाखा के साथ साझा किया है। संभावित जोखिमों को देखते हुए निगरानी जारी रखने की बात कही गई है।
फिलहाल क्रेटर का पानी निकल चुका है, लेकिन पहाड़ों पर जमी बर्फ खतरे की नई वजह बन गई है। ऐसे में छोचेन नदी और आसपास के इलाकों में आने वाले समय में भी सतर्क निगरानी जरूरी होगी।
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