भारत/नेपाल: प्रलय और तबाही के बीच इंसानियत और चमत्कार की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो किसी की भी आंखें नम कर दे। मलबे के ढेर में लगातार चार दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच जूझने के बाद, पांच साल के एक मासूम को जिंदा बाहर निकाल लिया गया। जब वह इस अंधेरी दुनिया से बाहर आया, तो दर्द से उसका शरीर कांप रहा था और वह बोल भी नहीं पा रहा था—बस इशारों से बता रहा था कि उसे कितना दर्द हो रहा है।
इस रोंगटे खड़े कर देने वाले पल में, वहां मौजूद सेना के एक देवदूत बने जवान ने आगे बढ़कर उस बच्चे को अपनी गोद में समेट लिया। मासूमियत और दर्द के उस अहसास को समझते हुए जवान ने प्यार से उसे खिचड़ी के छोटे-छोटे कौर खिलाए और दिलासा देते हुए कहा, “तुम्हें खाना होगा, जीना होगा और स्कूल जाना होगा। अंकल ने तुम्हारे लिए खास खिचड़ी बनाई है, तुम्हारी मम्मी सुरक्षित हैं और जल्द मिलेंगी।”
जवान ने बच्चे का दिल बहलाने के लिए यह भी कहा कि उसका खुद का भी उतनी ही उम्र का बेटा है, जिसे वह बेहद प्यार करता है। मलबे के अंधेरे और खौफ के साए से निकले इस मासूम को जब सेना के जवान का यह मानवीय और सात्विक स्पर्श मिला, तो यह दृश्य राहत कार्य की सबसे संवेदनशील और ऐतिहासिक तस्वीर बन गया। भले ही बच्चे के चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था, लेकिन उसकी यह सांसें इस बात का सबूत थीं कि उम्मीद का दामन कभी नहीं छोड़ना चाहिए। फिलहाल मासूम की हालत स्थिर है और उसे सुरक्षित उसके परिवार से मिलाने की प्रक्रिया जारी है।
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