पटना: राजधानी पटना की सड़कों पर अब सिर्फ इंसानी निगाह नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI भी नजर रखेगा। शहर की सफाई, सड़क और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं की पहचान के लिए पटना स्मार्ट सिटी की ओर से ‘सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट’ शुरू किया जा रहा है। नगर विकास विभाग ने इस योजना को मंजूरी दे दी है।
इस प्रोजेक्ट के तहत पटना नगर निगम के 75 वार्डों में करीब 19 AI आधारित ई-स्कूटर उतारे जाएंगे। इनका नाम ‘नगर नेत्रा’ रखा गया है। करीब चार वार्ड की जिम्मेदारी एक ई-स्कूटर पर होगी और ये शहर की सड़कों व गलियों में घूमकर लगातार नागरिक सुविधाओं की निगरानी करेंगे।
कैमरा देखेगा, AI समस्या पकड़ेगा
‘नगर नेत्रा’ ई-स्कूटर में स्मार्ट डैशकैम और GPS लगाया जाएगा। कैमरे 4K वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ करीब 110 डिग्री वाइड एंगल में सड़क और आसपास की तस्वीरें रिकॉर्ड करेंगे।
इसके बाद AI और मशीन लर्निंग तकनीक इन तस्वीरों और वीडियो का विश्लेषण करेगी। यानी सड़क पर कोई समस्या दिखाई देने पर उसे सिर्फ रिकॉर्ड नहीं किया जाएगा, बल्कि सिस्टम उसकी पहचान कर संबंधित विभाग तक सूचना पहुंचाने में भी मदद करेगा।
गड्ढे से लेकर आवारा मवेशी तक… 7 समस्याओं पर नजर
AI आधारित निगरानी व्यवस्था से शहर में कई तरह की समस्याओं को चिन्हित किया जाएगा। इनमें सड़क पर फैला कचरा और गंदगी, सड़क के गड्ढे, टूटे या खुले मैनहोल, खराब स्ट्रीट लाइट, अतिक्रमण और अवैध कब्जे, आवारा मवेशी, अवैध होर्डिंग्स शामिल हैं।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि अधिकारियों को किसी समस्या की शिकायत का इंतजार न करना पड़े। सड़क पर घूमते ‘नगर नेत्रा’ खुद शहर की स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेंगे।
गांधी मैदान के ICCC से होगी पूरी निगरानी
गांधी मैदान स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) में सेंट्रल सिविक सर्विसेज ऑपरेशंस सेंटर बनाया जाएगा। ई-स्कूटर और दूसरे कैमरों से मिलने वाला डेटा इसी सेंटर तक पहुंचेगा।
AI सिस्टम द्वारा किसी समस्या की पहचान किए जाने के बाद संबंधित विभाग और अधिकारी को मोबाइल ऐप के माध्यम से अलर्ट भेजने की व्यवस्था होगी। इससे समस्या की जानकारी मिलने और कार्रवाई शुरू होने के बीच का समय कम करने की कोशिश की जाएगी।
सप्ताह में दो बार हर वार्ड की ‘परीक्षा’
योजना की सबसे अहम बात यह है कि शहर के प्रत्येक वार्ड की सड़कों की सप्ताह में दो बार स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके लिए वार्डवार टाइमटेबल तैयार किया जाएगा।
इससे सिर्फ नई समस्या की जानकारी ही नहीं मिलेगी, बल्कि यह भी पता लगाया जा सकेगा कि कोई समस्या कितने समय से बनी हुई है और संबंधित विभाग ने उसके समाधान के लिए क्या कार्रवाई की।
यानी आने वाले समय में किसी सड़क पर महीनों से पड़ा कचरा, गड्ढा या खराब स्ट्रीट लाइट अधिकारियों की नजर से बच पाना मुश्किल होगा।
एक चार्ज में 100 KM से ज्यादा दौड़ेंगे ‘नगर नेत्रा’
शहर की लगातार निगरानी के लिए इन ई-स्कूटरों में 3 किलोवाट-प्रति-घंटे क्षमता की लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया जाएगा। एक बार चार्ज होने के बाद ई-स्कूटर 100 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकेंगे।
इनके लिए ICCC या अन्य निर्धारित स्थानों पर चार्जिंग हब बनाए जाने की योजना है, ताकि निगरानी व्यवस्था लगातार चलती रहे।
सितंबर तक एजेंसी का चयन
प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी का चयन सितंबर तक किए जाने की योजना है। एजेंसी के चयन के बाद ई-स्कूटर और AI आधारित निगरानी प्रणाली को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।
पटना बना मॉडल तो दूसरे शहरों में भी दौड़ेंगे ‘नगर नेत्रा’
पटना में यह प्रयोग सफल रहा तो इसका दायरा सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं रहेगा। बिहार सरकार इसी मॉडल को बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर, भागलपुर समेत राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में लागू करने की तैयारी कर रही है।
योजना सफल हुई तो आने वाले समय में शहर की सफाई से लेकर सड़क की हालत तक पर निगरानी का तरीका बदल सकता है। अब नगर निगम को समस्या की जानकारी देने के लिए सिर्फ शिकायतकर्ता का इंतजार नहीं करना पड़ेगा—सड़क पर घूमता ‘नगर नेत्रा’ खुद शहर की आंख बनकर बताएगा कि पटना में कहां व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
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