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Bihar: पति रग्बी एसोसिएशन के सचिव, पत्नी पर मैच खेले बिना मेडल-नौकरी का आरोप, BSSA की जांच से बिहार के खेल सिस्टम पर सवाल!

पटना: बिहार के खेल जगत से सामने आए एक मामले ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला...

पटना: बिहार के खेल जगत से सामने आए एक मामले ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिर्फ एक मेडल या नौकरी का नहीं, बल्कि खेल उपलब्धि के आधार पर सरकारी लाभ लेने की प्रक्रिया पर गंभीर सवालों से जुड़ा है।

बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) की जांच में आरोप सामने आया है कि वंदना कुमारी 2019 की सीनियर महिला राष्ट्रीय रग्बी-7 चैंपियनशिप में बिहार की टीम की आधिकारिक सूची में शामिल थीं, लेकिन उपलब्ध मैच फुटेज में वह किसी मुकाबले में खेलती नजर नहीं आईं। इसके बावजूद उनके नाम पर स्वर्ण पदक और आर्थिक लाभ दर्ज हुआ।

मामले को और गंभीर बना रही है एक अहम कड़ी—वंदना कुमारी के पति पंकज ज्योति बिहार रग्बी एसोसिएशन के सचिव हैं। यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ वंदना की कथित खेल उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी चयन और प्रमाणन प्रक्रिया पर उठ रहे हैं।

मैदान में खिलाड़ी कोई और, रिकॉर्ड में नाम किसी और का?

BSSA की जांच रिपोर्ट के मुताबिक 19 से 21 जुलाई 2019 को पटना के पाटलिपुत्र खेल परिसर में सीनियर महिला राष्ट्रीय रग्बी-7 चैंपियनशिप हुई थी। बिहार की टीम ने प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता।

आधिकारिक टीम पंजीकरण में वंदना कुमारी का नाम खिलाड़ी नंबर 12 के तौर पर दर्ज था।

लेकिन BSSA ने भारतीय रग्बी फुटबॉल यूनियन से प्राप्त रिकॉर्ड और मैच फुटेज की पड़ताल की। जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि वंदना किसी भी मुकाबले में खेलती दिखाई नहीं दीं।

इसके उलट जर्सी नंबर 12 पहने एक दूसरी खिलाड़ी पूरी प्रतियोगिता के दौरान टीम के साथ और मैचों में सक्रिय नजर आई।

यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—अगर मैदान पर जर्सी नंबर 12 में कोई और खिलाड़ी थी, तो आधिकारिक रिकॉर्ड में नंबर 12 के तौर पर वंदना का नाम कैसे दर्ज हुआ?

मैच नहीं खेला तो मेडल कैसे मिला?

BSSA की रिपोर्ट के मुताबिक वंदना कुमारी का नाम बिहार की स्वर्ण पदक विजेता टीम में दर्ज होने के आधार पर उन्हें खेल सम्मान योजना के तहत 33,333 रुपये की पुरस्कार राशि भी मिली।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पदक समारोह के वीडियो में वंदना दिखाई देती हैं और ट्रॉफी पकड़े हुए नजर आती हैं। हालांकि, जांच के अनुसार वह अन्य खिलाड़ियों की तरह बिहार टीम की जर्सी में नहीं थीं।

यानी विवाद का केंद्र यही है—मैदान पर भूमिका क्या थी और आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज उपलब्धि क्या थी?

पति रग्बी एसोसिएशन के सचिव, पत्नी को मिला खेल लाभ

मामले में सबसे ज्यादा चर्चा वंदना कुमारी और उनके पति पंकज ज्योति के संबंध को लेकर हो रही है।

पंकज ज्योति बिहार रग्बी एसोसिएशन के सचिव हैं, जबकि उनकी पत्नी वंदना पर उसी खेल से जुड़ी प्रतियोगिता में कथित तौर पर बिना खेले लाभ लेने के आरोप लगे हैं।

हालांकि, पति-पत्नी का संबंध अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन यही तथ्य अब जांच के दायरे में मौजूद परिस्थितियों को लेकर सवाल जरूर खड़े करता है।

मेडल से सरकारी नौकरी तक पहुंचा मामला

मामला सिर्फ 33,333 रुपये के पुरस्कार तक सीमित नहीं रहा। वंदना कुमारी को खेल कोटे के तहत भवन निर्माण विभाग में सरकारी नौकरी मिली है।

BSSA की जांच में उनके खेल उपलब्धियों से जुड़े दावों की भी पड़ताल की गई है।

वंदना ने 2024 में ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत ड्रैगन बोट खेल के आधार पर नौकरी से जुड़े लाभ का दावा किया था। जांच रिपोर्ट में 2023 की राष्ट्रीय प्रतियोगिता और थाईलैंड में प्रतियोगिता में भाग लेने के दावे का भी उल्लेख है।

BSSA के अनुसार, इन दावों से जुड़े कुछ पहलुओं पर विभागीय अनुमति और NOC को लेकर भी सवाल हैं।

BSSA ने FIR की सिफारिश की

मामले की गंभीरता को देखते हुए BSSA ने प्रथमदृष्टया इसे प्रतिरूपण और गलत तरीके से लाभ लेने का मामला माना है।

BSSA के महानिदेशक सह CEO रवींद्रण शंकरण ने 7 अगस्त को पटना SSP को पत्र भेजकर वंदना कुमारी के खिलाफ FIR दर्ज करने की सिफारिश की है।

इसके साथ ही भवन निर्माण विभाग के सचिव को भी विभागीय और कानूनी प्रावधानों के तहत जांच के लिए पत्र भेजा गया है।

अब आगे की जांच में यह स्पष्ट होना है कि प्रतियोगिता के आधिकारिक रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने से लेकर मेडल, पुरस्कार और सरकारी नौकरी तक पहुंचने की प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन हुआ था या नहीं।

बिहार के खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा सवाल

यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि खेल कोटे की नौकरी उन खिलाड़ियों के लिए होती है जो मैदान पर मेहनत कर राज्य और देश का नाम रोशन करते हैं।

ऐसे में अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो सवाल सिर्फ एक नौकरी या एक मेडल का नहीं होगा। सवाल यह होगा कि क्या असली खिलाड़ियों के हक पर कागजी उपलब्धियों ने कब्जा कर लिया?

फिलहाल आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया से होगी। लेकिन BSSA की जांच और FIR की सिफारिश ने बिहार की खेल व्यवस्था में चयन, प्रमाण-पत्र और खेल उपलब्धियों के सत्यापन की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।

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Mahuaa News

Author at mahuaanews.com
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