रोहतास: लगातार बारिश और सोन नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आ रही पानी की तेज धार ने इंद्रपुरी बराज पर दबाव बढ़ा दिया है। हालात ऐसे बने कि मंगलवार शाम बराज के सभी 69 गेट खोलने पड़े। इसके बाद सोन नदी के निचले हिस्से में 5,16,520 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। भारी डिस्चार्ज के बाद नदी किनारे बसे निचले इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
सिंचाई सृजन जल संसाधन विभाग, डेहरी के मुख्य अभियंता अजय कुमार सिंह के अनुसार, मंगलवार शाम छह बजे इंद्रपुरी बराज पर 5,16,520 क्यूसेक पानी उपलब्ध था। बराज का जलस्तर करीब 355 फीट पर संतुलित रखने के लिए सभी गेट खोलकर अतिरिक्त पानी सोन नदी में प्रवाहित किया जा रहा है।
पहाड़ से जलाशय तक… हर तरफ से सोन की ओर बढ़ा पानी
सोन नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में लगातार बारिश के साथ विभिन्न जलाशयों और बराज से छोड़ा गया पानी भी इंद्रपुरी पहुंच रहा है। अधिकारियों के मुताबिक रिहंद जलाशय से 17,507 क्यूसेक, वाणसागर जलाशय से 1,15,710 क्यूसेक और मुहम्मदगंज भीम बराज से 1,60,058 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
इन स्रोतों से लगातार आ रही भारी आवक ने इंद्रपुरी बराज पर जलदबाव बढ़ा दिया है। विभाग की टीमें स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
पांच लाख क्यूसेक पार होते ही नहरों पर लगा ब्रेक
सोन नदी में पानी का डिस्चार्ज पांच लाख क्यूसेक के पार पहुंचते ही प्रमुख लिंक नहरों में पानी की आपूर्ति बंद कर दी गई है। विभागीय नियमों के अनुसार, इस स्थिति में बराज से नहरों में पानी देने के बजाय अतिरिक्त पानी को सोन नदी के निचले हिस्से में सुरक्षित रूप से प्रवाहित किया जाता है।
इससे बराज पर दबाव नियंत्रित रखने के साथ किसी बड़े खतरे की आशंका को कम किया जा सके।
निचले इलाकों पर नजर, नदी किनारे जाने से बचें
इंद्रपुरी बराज से 5.16 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बाद सोन नदी के निचले हिस्से में जलस्तर बढ़ने की संभावना है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने लोगों से तेज बहाव वाले हिस्सों से दूर रहने और नदी में जाने से बचने की अपील की है। लगातार बारिश और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से पानी की आवक को देखते हुए आने वाले घंटों में सोन नदी के जलस्तर पर विशेष नजर रखी जा रही है।
फिलहाल तस्वीर साफ है—इंद्रपुरी के 69 गेट खुले हैं और सोन की धारा में 5,16,520 क्यूसेक पानी उतर रहा है। आने वाले समय में पानी की आवक बढ़ती है या घटती है, इसी पर निचले इलाकों का खतरा निर्भर करेगा।
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