औरंगाबाद: क्या बिहार में कानून भी “रेट लिस्ट” पर चल रहा है? औरंगाबाद से सामने आई एक घटना ने पूरे पुलिस सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिसियप थाना में तैनात सब-इंस्पेक्टर उमेश कुमार को विजिलेंस टीम ने 50 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।
इस कार्रवाई के बाद सवाल सिर्फ एक दरोगा पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यशैली पर उठ रहे हैं।
डेढ़ लाख मांग, एक लाख में डील?—आरोपों ने मचाई सनसनी
शिकायतकर्ता डॉ. लक्ष्मण राम का आरोप है कि दरोगा ने केस में राहत देने के नाम पर पहले 1.5 लाख रुपये मांगे, बाद में “डील” 1 लाख में तय हुई। बताया जा रहा है कि 50 हजार पहली किस्त के तौर पर दिए जा रहे थे—और उसी दौरान विजिलेंस ने छापा मार दिया।
अगर ये आरोप सही हैं, तो सवाल उठता है—क्या न्याय भी अब किस्तों में बिक रहा है?
नहीं दोगे पैसे तो केस में फंसाओगे—गंभीर आरोप
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पैसे नहीं देने पर परिवार को झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी जा रही थी।
साथ ही, मुलाकात के नाम पर बार-बार खर्च करवाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
विजिलेंस का एक्शन—या सिस्टम की पोल खुली?
जैसे ही पैसे का लेन-देन हुआ, पहले से तैयार विजिलेंस टीम ने दरोगा को मौके पर ही पकड़ लिया।
लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक मामला है या सिस्टम में अंदर तक जड़ें जमा चुका भ्रष्टाचार?
जनता पूछ रही है—किस पर करें भरोसा?
इस घटना के बाद आम लोगों के बीच गुस्सा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब जांच करने वाला ही “सौदेबाजी” करने लगे, तो इंसाफ की उम्मीद किससे की जाए?
नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप शिकायतकर्ता के हैं। जांच के बाद ही सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होगी।
ये खबर भी पढ़े: Bihar: 32 साल की यात्रा से 33वें वर्ष में कदम, शेखपुरा ने मनाया स्थापना दिवस, विकास और विरासत का दिखा संगम!