पटना: NEET पेपर लीक के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्रों पर बिहार में जो कुछ हुआ, उसने पूरे सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या अपनी मेहनत और भविष्य के लिए आवाज उठाना अब गुनाह हो गया है?
जहानाबाद में 30 राउंड फायरिंग, कई जिलों में लाठीचार्ज, और सड़कों पर छात्रों को घसीटती पुलिस—ये तस्वीरें सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की कहानी भी कह रही हैं।
दोषी कौन—छात्र या सिस्टम?
सरकार कह रही है कि भीड़ में “असामाजिक तत्व” थे।
लेकिन सवाल ये है—
– पेपर लीक हुआ या नहीं?
– जिम्मेदारों पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?
– छात्रों के सवालों का जवाब लाठी और फायरिंग से क्यों दिया गया?
250+ तस्वीरें जारी, लेकिन असली गुनहगार कहाँ?
पुलिस ने 250 से ज्यादा कथित उपद्रवियों की तस्वीरें जारी कर दीं, गिरफ्तारियां भी हो रही हैं। पर छात्रों का कहना है—“हम पर कार्रवाई तेज, लेकिन पेपर लीक कराने वालों पर चुप्पी क्यों?”
सड़क पर गुस्सा, सिस्टम पर अविश्वास
कटिहार में अधिकारी घायल, कई जगह पत्थरबाजी—हालात जरूर बिगड़े।
लेकिन क्या ये गुस्सा अचानक है? या सालों से जमा भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ फूटता आक्रोश?
सोशल मीडिया पर भी निगरानी—आवाज दबाने की कोशिश?
अब जांच सोशल मीडिया और YouTubers तक पहुंच गई है। सवाल उठ रहा है—क्या ये जांच सच तक पहुंचने के लिए है या आवाज दबाने के लिए?
‘बिहार बंद’ का ऐलान—आंदोलन और तेज होगा
25 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान कर छात्र संगठनों ने साफ कर दिया है—न्याय नहीं, तो आंदोलन रुकेगा नहीं।
पुलिस द्वारा जारी छात्रों की तस्वीर










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