पटना: बिहार के सरकारी अस्पतालों के लिए मेडिकल वेस्ट डस्टबिन की खरीद को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राजद सांसद सुधाकर सिंह ने रविवार को प्रेस सम्मेलन में आरोप लगाया कि 305 करोड़ रुपये के बजट में लगभग 275 करोड़ रुपये की अनियमितता हुई है। उन्होंने पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को इस मामले में मुख्य रूप से दोषी बताया।
सुधाकर सिंह ने प्रेस सम्मेलन में एक डस्टबिन प्रदर्शित करते हुए कहा कि इसकी क्षमता मात्र 60 लीटर है। उन्होंने दावा किया कि इसमें प्रयुक्त प्लास्टिक की बाजार कीमत 8 से 10 रुपये प्रति पीस है, जबकि इसे 100 रुपये से अधिक मूल्य पर खरीदा गया। विपक्ष का आरोप है कि सामान्यतः 500 से 1,500 रुपये मूल्य का डस्टबिन 15,490 रुपये प्रति यूनिट की दर से क्रय किया गया।
सांसद ने टेंडर प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि निगम स्वयं निर्णय लेता है और इसके प्रबंध निदेशक की नियुक्ति मुख्यमंत्री द्वारा की जाती है। उन्होंने विकास आयुक्त की भूमिका पर भी टिप्पणी की और कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 10 लाख रुपये से अधिक की खरीद के लिए विभागीय मंत्री की स्वीकृति आवश्यक होती है। यह फाइल तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के पास गई थी।
इस मुद्दे पर जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि खरीद प्रक्रिया महागठबंधन सरकार में तेजस्वी यादव के स्वास्थ्य मंत्री रहते आरंभ हुई थी और एनडीए सरकार में मंगल पांडेय के कार्यकाल में उसे अंतिम रूप दिया गया। दोनों के कार्यकाल की जांच होनी चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि खरीद में कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर मामले का ठीकरा केवल उन पर नहीं फोड़ा जा सकता।
लगातार उठ रहे सवालों के बीच स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने बेगूसराय से प्राप्त शिकायत के आधार पर विभाग के विशेष सचिव को मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग भी की जा रही है।
मामले में आगे की जांच और दस्तावेजों के आधार पर तथ्य सामने आने की प्रतीक्षा है।
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