गोपालगंज: कुछ शिक्षक किताबें पढ़ाते हैं, कुछ बच्चे रटाते हैं… लेकिन कुछ शिक्षक बच्चों के मन में ज्ञान की लौ जगा देते हैं। गोपालगंज के कुचायकोट प्रखंड स्थित राजकीय कन्या मध्य विद्यालय की सहायक शिक्षिका पुष्पा प्रसाद ठीक ऐसी ही शिक्षिका हैं। उनकी मेहनत और नवाचार को आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 देकर सम्मानित किया।
शिक्षक दिवस के मौके पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समारोह में पुष्पा प्रसाद ने राष्ट्रपति के हाथों यह सर्वोच्च सम्मान प्राप्त किया। इससे पहले वे दो बार राज्य स्तरीय पुरस्कार भी जीत चुकी हैं।
खेल-खेल में शिक्षा का जादू
पुष्पा प्रसाद जानती हैं कि छोटे बच्चे खेल सबसे ज्यादा पसंद करते हैं। इसलिए उन्होंने ‘खेल-खेल में शिक्षा’ का तरीका अपनाया। कठपुतली, रोल-प्ले और रंग-बिरंगी फ्लैश कार्ड्स के जरिए वे जटिल विषयों को भी बच्चों के लिए आसान और मजेदार बना देती हैं। रटने की बजाय गतिविधि आधारित शिक्षा उनका मुख्य हथियार है।
गरीबी बनी चुनौती, दीवारें बनीं समाधान
जब उन्होंने देखा कि कई गरीब बच्चे कॉपी-कलम तक नहीं खरीद पाते, तो उन्होंने हार नहीं मानी। स्कूल और बस्तियों की दीवारों को ही ब्लैकबोर्ड बना दिया। सीमित साधनों में भी उन्होंने साबित कर दिया कि संकल्प हो तो दीवार भी ज्ञान का माध्यम बन सकती है।
सिर्फ बच्चे नहीं, मांओं को भी पढ़ाया
अभिभावक-शिक्षक बैठक में पुष्पा प्रसाद ने देखा कि ज्यादातर छात्राओं की माताएं निरक्षर हैं और हाजिरी रजिस्टर पर अंगूठा लगाती हैं। इस दृश्य ने उन्हें झकझोर दिया। उन्होंने अतिरिक्त समय निकालकर महिलाओं के लिए साक्षरता कक्षाएं शुरू कीं। आज वे माताएं गर्व से अपने हस्ताक्षर करती हैं।
परिवार का साथ और समर्पण
पुष्पा प्रसाद मूल रूप से पटना की रहने वाली हैं। उनके पिता भारतीय वायु सेना में सेवा दे चुके हैं। पति बाल्मीकि प्रसाद भी शिक्षक हैं। वे कहती हैं, “मेरी सफलता का राज मेरे पति हैं। उनकी प्रेरणा से ही मैं शिक्षक बनी।”
पुरस्कार मिलने के बाद पुष्पा प्रसाद ने भावनात्मक अंदाज में कहा,
“मैंने कभी पुरस्कार के लिए काम नहीं किया। मेरा पूरा ध्यान हमेशा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और व्यावहारिक शिक्षा देने पर रहा। यह सम्मान पूरे बिहार, राज्य की बेटियों और गोपालगंज को समर्पित है।”
एक साधारण स्कूल की शिक्षिका ने साबित कर दिया है कि सच्ची शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती। जब शिक्षक का दिल बच्चों और समाज के लिए धड़कता है, तो दीवारें भी बोलने लगती हैं और गांव की बेटियां आसमान छूने लगती हैं।
ये खबर भी पढ़े: डस्टबिन नहीं, डकैती; सुधाकर सिंह ने लगाया मंगल पांडे पर गंभीर आरोप!