मोतिहारी: बिहार में एक बार फिर खाद घोटाले ने सर उठाया है। पूर्वी चंपारण के बंजरिया में मनोकामना फर्टिलाइजर्स का गोदाम सरकारी सील से बंद था। लेकिन जब अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचे तो सील टूटी मिली… और अंदर रखी 780 बोरी एनएफएल यूरिया में से 700 बोरियां गायब!
बची थीं महज 80 बोरियां।
सवाल साफ है—सील लगने के बाद भी इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया कैसे उड़ गया?
ट्रक में छिपा था खेल
मौके पर खड़े एक ट्रक की तलाशी ली गई तो उसमें 500 बोरी यूरिया निकला। बाहर 250 बोरी और पड़ी थीं। कुल 750 बोरी। लेकिन इनके पास एक भी वैध कागजात नहीं था। जांच में खुलासा हुआ कि ये उसी सीलबंद गोदाम से निकाली गई थीं। प्रशासन ने तुरंत पूरी consignment जब्त कर ली।
गोदाम संचालक, ट्रक मालिक और ड्राइवर पर केस दर्ज हो चुका है।
मंत्री का सख्त रुख
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। जिला कृषि पदाधिकारी को साफ निर्देश दिया—
“24 घंटे के अंदर पूरी कार्रवाई रिपोर्ट मेरे सामने होनी चाहिए।”
मंत्री ने कहा कि किसानों की मेहनत की कमाई से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खाद की कालाबाजारी पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
अब देखना यह है कि सील तोड़कर यूरिया गायब करने वाले गिरोह तक जांच कितनी गहराई तक पहुंचती है। क्योंकि ये सिर्फ 700 बोरी यूरिया का मामला नहीं… ये किसानों के भरोसे पर हुआ हमला है।
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