गया: गहलौर में आयोजित दशरथ मांझी महोत्सव में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने नशाबंदी और महादलितों की जमीन पर अवैध कब्जे के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक अधिकारी सहयोग करें तो बिहार में नशाबंदी को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू की गई शराबबंदी नीति का पालन वर्तमान सरकार भी कर रही है। उन्होंने गुजरात का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय से नशाबंदी लागू है और बिहार में भी इसे प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि शराब और अन्य नशीले पदार्थ गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को कमजोर करते हैं तथा सामाजिक समस्याओं को बढ़ावा देते हैं। समाज के लोगों से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि सभी को संकल्प लेना चाहिए कि वे नशे को जीवन से बाहर करेंगे।
अपने संघर्षों का उल्लेख करते हुए मांझी ने कहा कि उनके माता-पिता ने मजदूरी कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया। कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करते हुए उन्होंने राजनीति में अपनी पहचान बनाई और आज केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी ने भी अपने जीवन में संघर्ष, मेहनत और संकल्प का रास्ता दिखाया था, न कि नशे का।
मांझी ने महादलित समाज की जमीन पर अवैध कब्जे का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को विशेष अभियान चलाकर गरीबों और महादलितों की जमीन को कब्जामुक्त कराना चाहिए। उन्होंने जिला प्रशासन से इस दिशा में गंभीर पहल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि अधिकारी इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाएंगे तो वे इस मुद्दे को और मजबूती से उठाएंगे तथा दशरथ मांझी के सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि दशरथ मांझी का सपना केवल पहाड़ काटना नहीं था, बल्कि समाज के वंचित और गरीब वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी था।
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