शेखपुरा: गांधी जयंती और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर साई कॉलेज ऑफ टीचर्स ट्रेनिंग, शेखपुरा में आयोजित सेमिनार में शिक्षा को केवल किताबों और परीक्षा तक सीमित रखने के बजाय उसके व्यापक उद्देश्य पर चर्चा हुई। “गांधी जी के शैक्षिक विचार” विषय पर आयोजित सेमिनार सह विचार गोष्ठी में प्रशिक्षुओं और प्राध्यापकों ने महात्मा गांधी के शिक्षा दर्शन, नई तालीम, नैतिक मूल्यों और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अंजेश कुमार ने किया। इस दौरान महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके जीवन, संघर्ष और आदर्शों को याद किया गया। इसके बाद प्रशिक्षुओं ने गांधी जी के शैक्षिक विचारों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रस्तुतियां दीं।
सेमिनार में प्रशिक्षुओं ने बताया कि महात्मा गांधी शिक्षा को महज पुस्तकीय ज्ञान हासिल करने का माध्यम नहीं मानते थे। उनके शिक्षा दर्शन में व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और नैतिक विकास को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया था। गांधी जी की ‘नई तालीम’ में काम और अनुभव के माध्यम से सीखने, श्रम के सम्मान, आत्मनिर्भरता और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर जोर दिया गया था।

विचार गोष्ठी के दौरान प्रशिक्षुओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि आज के समय में शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी को जोड़ना क्यों जरूरी है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक केवल विषय का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और सोच को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में भावी शिक्षकों के लिए सत्य, अहिंसा, अनुशासन, स्वच्छता, समानता, सहयोग और आत्मनिर्भरता जैसे मूल्यों को समझना आवश्यक है।
प्राध्यापकों ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए प्रशिक्षुओं को उनके आदर्शों से प्रेरणा लेने की बात कही। वक्ताओं के अनुसार गांधी जी ने सत्य और अहिंसा को अपने जीवन का आधार बनाया, जबकि लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा के जरिए सार्वजनिक जीवन में अलग पहचान बनाई।
सेमिनार में चर्चा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि गांधी के शिक्षा दर्शन को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में देखने के बजाय वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक जीवन से जोड़कर समझा जाए। प्रशिक्षुओं ने अपने विचारों के माध्यम से बताया कि अनुभव आधारित शिक्षा, श्रम की गरिमा, स्वावलंबन और नैतिक विकास जैसे गांधीवादी विचार आज भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में उपयोगी हो सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के व्यक्तित्व और कृतित्व से जुड़े प्रसंगों पर भी चर्चा हुई। प्रशिक्षुओं ने अपने प्रस्तुतिकरण के जरिए यह समझने का प्रयास किया कि एक शिक्षक के रूप में वे आने वाली पीढ़ी तक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान ही नहीं, बल्कि सकारात्मक सोच और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी पहुंचा सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में कॉलेज के प्रशिक्षुओं और प्राध्यापकों ने गांधी एवं शास्त्री के आदर्शों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अपनाने तथा समाज में नैतिक एवं सकारात्मक मूल्यों के प्रसार में योगदान देने का संकल्प लिया। सेमिनार में महाविद्यालय के प्राध्यापकगण और बड़ी संख्या में प्रशिक्षु उपस्थित रहे।
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