पटना: बिहार की सियासत में विधान परिषद चुनाव से पहले रोहिणी आचार्य की पटना वापसी ने तेजस्वी यादव को लेकर राजनीतिक चर्चाओं को फिर तेज कर दिया है। करीब 11 महीने बाद पटना पहुंचीं रोहिणी का एयरपोर्ट पर लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और मीसा भारती ने स्वागत किया। हालांकि रोहिणी ने अपनी यात्रा को निजी बताते हुए कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहने आई हैं और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।
तेजस्वी की सियासत के बीच रोहिणी की वापसी क्यों अहम?
रोहिणी की वापसी ऐसे समय हुई है जब बिहार में आठ विधान परिषद सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 23 अक्टूबर को मतदान होना है और 27 अक्टूबर को मतगणना होगी। ऐसे में परिवार से जुड़े किसी भी घटनाक्रम पर राजनीतिक नजरें टिकना स्वाभाविक है।
इससे पहले सितंबर में RJD की MLC उम्मीदवारों की सूची पर भी रोहिणी ने सार्वजनिक सवाल उठाए थे। उन्होंने पार्टी में समर्पित नेताओं की उपेक्षा और अवसरवादियों को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप लगाया था।
एक तरफ MLC चुनाव, दूसरी तरफ परिवार की चर्चा
तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD चुनावी मैदान में अपने उम्मीदवारों के साथ सक्रिय है। वहीं रोहिणी के पटना लौटने के बाद परिवार और पार्टी से जुड़े पुराने घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गए हैं।
हालांकि, अभी तक रोहिणी ने अपनी पटना यात्रा को किसी राजनीतिक अभियान या तेजस्वी के खिलाफ किसी नए कदम से नहीं जोड़ा है। इसलिए उनकी वापसी का राजनीतिक असर कितना होगा, यह फिलहाल भविष्य की बात है।
अब सबसे बड़ा सवाल- रोहिणी का अगला कदम क्या?
रोहिणी ने साफ कहा है कि वह माता-पिता से मिलने पटना आई हैं। लेकिन MLC चुनाव के बीच उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक चर्चाओं को जरूर बढ़ा दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि रोहिणी आने वाले दिनों में RJD, MLC उम्मीदवारों या तेजस्वी यादव को लेकर कोई नया सार्वजनिक बयान देती हैं या नहीं। फिलहाल चुनावी माहौल में तेजस्वी और रोहिणी से जुड़ा हर घटनाक्रम राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन गया है।
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