बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में दुर्गा पूजा के दौरान आयोजित भक्ति जागरण कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। वीडियो मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पानगाछी चौक स्थित वैष्णवी दुर्गा स्थान के मंच से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि देर रात कार्यक्रम बंद कराने पहुंचे दरोगा अनिल कुमार झा ने मंच पर डांस कर रही एक महिला कलाकार को थप्पड़ मारा और धक्का देकर नीचे उतार दिया। इसके बाद वहां मौजूद लोगों के विरोध के बीच दरोगा द्वारा सर्विस पिस्टल निकालने और भीड़ को धमकाने का आरोप भी सामने आया है।
बताया जा रहा है कि घटना मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात करीब तीन बजे की है। जागरण कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी पुलिस पदाधिकारी को दी गई थी। देर रात तक कार्यक्रम जारी रहने के बाद दरोगा उसे बंद कराने पहुंचे थे। इसी दौरान मंच पर हुई कार्रवाई और आयोजकों के साथ कथित धक्का-मुक्की को लेकर विवाद बढ़ गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई और मौके पर स्थिति संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
कार्यक्रम बंद कराने पहुंचे थे दरोगा, मंच पर बढ़ा विवाद
जानकारी के मुताबिक, मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पानगाछी चौक के पास वैष्णवी दुर्गा स्थान में दुर्गा पूजा के अवसर पर भक्ति जागरण का आयोजन किया गया था। कार्यक्रम देर रात तक चल रहा था। इसी दौरान ड्यूटी पर तैनात दरोगा अनिल कुमार झा कार्यक्रम बंद कराने पहुंचे।
आरोप है कि दरोगा ने पहले आयोजकों से कार्यक्रम बंद करने को कहा। जब कार्यक्रम बंद नहीं हुआ तो वह मंच पर चढ़ गए। बताया जा रहा है कि मंच पर पहुंचने के बाद आयोजक के साथ उनकी धक्का-मुक्की हुई और उन्होंने डांस कर रही महिला कलाकार को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद महिला कलाकार को धक्का देकर मंच से नीचे उतारने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, घटना के पूरे क्रम और विवाद शुरू होने की परिस्थितियों को लेकर उपलब्ध जानकारी सीमित है। वायरल वीडियो और पुलिस के आधिकारिक बयान के आधार पर ही घटनाक्रम का आकलन किया जाना चाहिए।
विरोध के बीच पिस्टल निकालने का आरोप, भीड़ में बढ़ा आक्रोश
महिला कलाकार के साथ कथित व्यवहार के बाद मौके पर मौजूद कुछ लोग नाराज हो गए। आरोप है कि ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और इसी दौरान दरोगा तथा लोगों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। दावा किया जा रहा है कि दरोगा ने अपनी सर्विस पिस्टल निकालकर लहराई और भीड़ को धमकाया। कुछ विवरणों में हथियार भीड़ की ओर तानने का आरोप भी लगाया गया है।
घटना के बाद कार्यक्रम स्थल पर तनाव की स्थिति पैदा होने की बात कही जा रही है। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
पुलिस पदाधिकारी द्वारा हथियार निकाले जाने की परिस्थितियों, उस समय मौजूद लोगों के व्यवहार और कार्रवाई की आवश्यकता का आकलन जांच के बाद ही किया जा सकता है। वायरल वीडियो के आधार पर किसी एक पक्ष की पूरी जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा।
एसपी मनीष ने वायरल वीडियो पर जारी किया बयान
इस मामले में बेगूसराय के एसपी मनीष ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मुफस्सिल थाना क्षेत्र के वैष्णवी दुर्गा स्थान, पानगाछी के पूजा पंडाल और मंच से संबंधित वीडियो सामने आया है।
एसपी के बयान के अनुसार, वीडियो में देर रात मंच पर कुछ डांसरों द्वारा अशोभनीय डांस किए जाने की बात दिखाई देती है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस वजह से उत्पन्न अव्यवस्था को नियंत्रित करने के उद्देश्य से वहां तैनात पुलिस पदाधिकारी मंच पर चढ़े। वीडियो में डांसरों को हटाने और आयोजकों के साथ धक्का-मुक्की जैसी स्थिति दिखाई देने की बात भी पुलिस की ओर से कही गई है।
पुलिस के इस बयान में कार्रवाई के पीछे अव्यवस्था नियंत्रित करने की वजह बताई गई है। वहीं, महिला कलाकार को थप्पड़ मारने और भीड़ के सामने सर्विस पिस्टल निकालने के आरोपों को लेकर पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में इन आरोपों पर कार्रवाई या जांच के अंतिम निष्कर्ष का विवरण सामने नहीं आया है।
वायरल वीडियो के बाद पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल
बेगूसराय की इस घटना ने धार्मिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की कार्रवाई के तरीके को लेकर चर्चा छेड़ दी है। एक ओर पुलिस का कहना है कि देर रात मंच पर हो रही गतिविधियों से उत्पन्न अव्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया गया। दूसरी ओर, महिला कलाकार के साथ कथित मारपीट और हथियार निकालने के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है।
अब इस पूरे मामले में वायरल वीडियो की जांच, घटना के दौरान मौजूद लोगों के बयान और पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई से जुड़े तथ्यों का सामने आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल घटना से संबंधित आरोपों और पुलिस के बयान को अलग-अलग समझना जरूरी है। जांच या आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी आरोप को अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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