शेखपुरा। जिले में कानून का शिकंजा कसते ही फरार आरोपियों में हड़कंप मच गया है। अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) मामलों के विशेष न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने गुरुवार को नगर क्षेत्र के लालबाग मोहल्ला में एक बेहद कड़े और अलग अंदाज में फरार अभियुक्तों के खिलाफ कार्रवाई की। मोहल्ले में जब अचानक ढोल-नगाड़े और डुगडुगी बजने लगी, तो पूरा इलाका अचंभित रह गया।
SC-ST थानाध्यक्ष अजितेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल लालबाग मोहल्ला स्थित डीएम उच्च विद्यालय के समीप पहुंची। पुलिस ने वहां फरार चल रहे आरोपी गोरेलाल साव और उनके बेटों के घर पर ‘इश्तिहार’ चिपकाते हुए आत्मसमर्पण करने की आखिरी मोहलत दी है।
थानाध्यक्ष अजितेंद्र कुमार ने इस संबंध में बताया कि यह कार्रवाई अनुसूचित जाति जनजाति उत्पीड़न निषेध मामलों के विशेष न्यायाधीश के न्यायालय से प्राप्त आदेश के आलोक में की गई है। पुलिस ने मोहल्ले में ढोल-बाजे और डुगडुगी बजवाकर सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि आरोपी जल्द से जल्द अदालत में हाजिर हों। गाजे-बाजे के साथ पुलिस की भारी मुस्तैदी देखकर गोरेलाल साव सहित घर पर मौजूद अन्य परिजन तुरंत मौके से फरार हो गए।
पुलिस ने फरार अभियुक्तों—गोरेलाल साव, उनके पुत्र अशोक साव, लालू कुमार और राजन कुमार—के घर के मुख्य दरवाजे पर कानूनी इश्तिहार चश्मा (चिपका) कर दिया है। थानाध्यक्ष ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशानुसार इन सभी फरार अभियुक्तों के घरों पर कानूनी इश्तिहार चिपका दिया गया है। इन्हें अदालत में हाजिर होने के लिए ठीक एक महीने की मोहलत दी गई है। अगर तय समय सीमा (एक माह) के भीतर ये सभी आरोपी न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो पुलिस दोबारा आएगी और इनके घर की सभी चल-अचल संपत्तियों को कुर्क (जब्त) कर लिया जाएगा।
आमतौर पर पुलिस दबिश शांत तरीके से देती है, लेकिन इस बार कड़े कानूनी संदेश और ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंची पुलिस को देखकर लालबाग मोहल्ले के लोग दंग रह गए। आसपास के घरों और दुकानों से लोग इस पूरी कार्रवाई को देखने के लिए जुट गए। पुलिस की इस सख्त मुनादी के बाद अब आरोपियों के पास कानून के आगे सरेंडर करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।
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