पटना: बिहार सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए ‘विकसित भारत-ग्रामीण रोजगार एवं आजीविका गारंटी अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम जी)’ की शुरुआत कर दी है। गुरुवार को पटना के अधिवेशन भवन में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से इस नई योजना का भव्य शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विभागीय मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि यह योजना मनरेगा के 20 वर्षों बाद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में एक नया अध्याय है। उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था में काम के लिए आवेदन करने वाले मजदूरों को यदि 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो उन्हें सरकार की ओर से बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा।
125 दिन रोजगार की गारंटी
नई योजना के तहत अब अकुशल मजदूरों को वर्ष में 125 दिन रोजगार की गारंटी दी जाएगी, जबकि पहले यह सीमा 100 दिन थी। सरकार ने इस योजना में मजदूरी दर बढ़ाकर 300 रुपये प्रतिदिन करने को भी मंजूरी दी है।
राज्य और केंद्र की साझा भागीदारी
मंत्री ने बताया कि इस योजना में मजदूरी मद का 40 प्रतिशत खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। केंद्र सरकार से बिहार को नौ महीने की अवधि के लिए 6715 करोड़ 83 लाख रुपये का आवंटन मिला है, जबकि राज्य सरकार ने 4477 करोड़ 22 लाख रुपये का प्रावधान किया है।
तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें
योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए ग्राम पंचायतों को उनकी जरूरत, विकास इंडेक्स और संसाधनों के आधार पर ए, बी और सी श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्यों को गति देना है।
देरी पर मिलेगा स्वतः मुआवजा
मंत्री ने स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मजदूरों को 0.05 प्रतिशत प्रतिदिन के हिसाब से स्वतः क्षतिपूर्ति दी जाएगी।
ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव
कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि यह योजना केवल रोजगार नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने दावा किया कि इससे लाखों श्रमिक परिवारों के जीवन स्तर में सुधार होगा।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जीविका दीदियां और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
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ब्यूरो हेड महुआ न्यूज़
बिहार /झारखण्ड