जमुई से सामने आई यह खबर सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर छिपी उस सच्चाई को उजागर करती है, जहां रक्षक ही भक्षक बन बैठे। एक क्रेटा गाड़ी, 5 लाख की फिरौती और खाकी पर लगे गंभीर आरोप—पूरे मामले ने इलाके में सनसनी फैला दी है।
टाउन थाना क्षेत्र के नर्वदा गांव निवासी पिंटू कुमार ने 23 अप्रैल को दर्ज कराए गए कांड संख्या 193/2026 में बताया कि उनके बड़े भाई संतोष कुमार दोपहर में अपनी क्रेटा गाड़ी से घर से निकले थे, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटे। चिंता के बीच शाम करीब 7:30 बजे संतोष कुमार का फोन आया—आवाज़ में डर साफ था। उन्होंने बताया कि उनका अपहरण कर लिया गया है और उन्हें छोड़ने के लिए 5 लाख रुपये की मांग की जा रही है।
परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आनन-फानन में टाउन थाना को सूचना दी गई और फिर पिंटू कुमार अपने साले राहुल कुमार और चचेरे भाई मनीष के साथ रकम का इंतजाम कर नवादा की ओर निकल पड़े। आरोप है कि पकरीबरावां उत्पाद थाना में “डील” हुई और क्रेटा गाड़ी छोड़ने के नाम पर डेढ़ लाख रुपये दे दिए गए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई—यहीं से शुरू हुआ असली खुलासा। जमुई पुलिस की जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। इस पूरे खेल में पकरीबरावां उत्पाद थाना के ही दो एएसआई और दो होमगार्ड की संलिप्तता पाई गई। यानी जिन पर सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस फिरौती के खेल में शामिल थे।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान एएसआई दिलीप कुमार के घर से फिरौती के रूप में लिया गया डेढ़ लाख रुपये बरामद किया गया। साथ ही क्रेटा कार भी पुलिस ने जब्त कर ली है।
यह मामला सिर्फ एक गाड़ी या फिरौती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे पर चोट है जो आम लोग पुलिस पर करते हैं। सवाल अब भी वही है—जब कानून के रखवाले ही कानून तोड़ने लगें, तो आम आदमी किससे उम्मीद करे?
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और संकेत हैं कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि बिहार में अपराध का चेहरा सिर्फ बाहरी नहीं, बल्कि सिस्टम के भीतर भी छिपा हुआ है।
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