हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग शहर से एक अनोखी और गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। शहर के निवासी जयराम शर्मा ने अपने घर की छत पर बने रूफ गार्डन में दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल जापान के प्रसिद्ध मियाजाकी आम की सफल खेती कर सभी को चौंका दिया है।
जयराम शर्मा ने बताया कि उन्होंने कुछ वर्ष पूर्व मियाजाकी आम का पौधा ऑनलाइन मंगवाकर अपने रूफ गार्डन में गमले में लगाया था। नियमित देखभाल, संतुलित खाद और उचित सिंचाई के चलते इस वर्ष पेड़ पर उच्च गुणवत्ता वाले आकर्षक फल आए हैं। पेड़ पर लगे लाल और बैंगनी रंग के आम लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, जिससे यह पहल चर्चा का विषय बन गई है।
मियाजाकी आम मूल रूप से जापान के मियाजाकी शहर में उगाया जाता है और इसे “ताई-नो-तामागो” यानी “सूरज का अंडा” कहा जाता है। यह आम पकने के बाद सामान्य आमों की तरह पीला नहीं होता, बल्कि गहरे लाल और बैंगनी रंग का दिखाई देता है। इसका औसत वजन लगभग 350 ग्राम होता है और यह सामान्य आमों की तुलना में अधिक मीठा माना जाता है।
इस आम में एंटीऑक्सीडेंट, फोलिक एसिड और बीटा-कैरोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं, विशेषकर आंखों के लिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है।
हालांकि जयराम शर्मा ने स्पष्ट किया कि वे इस आम को बेचने के बजाय अपने परिवार के साथ इसका स्वाद लेना पसंद करेंगे। उनकी इस पहल ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों में भी नई तकनीक और नवाचार के जरिए बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि हजारीबाग की जलवायु और मिट्टी मियाजाकी जैसे उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए अनुकूल हो सकती है। यदि किसान वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती अपनाएं, तो यह उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
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शशांक शेखर, हजारीबाग.