रांची: जय जगन्नाथ के जयघोष से पूरा झारखंड गुरुवार को भक्तिमय हो उठा। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की रथयात्रा में ऐसा आस्था का सैलाब उमड़ा कि राजधानी रांची का जगन्नाथपुर मंदिर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ से भर गया।
सुबह करीब 3 बजे से ही भक्त मंदिर पहुंचने लगे, देखते ही देखते श्रद्धालुओं की कतार करीब 2 किलोमीटर तक पहुंच गई। हर कोई महाप्रभु के दर्शन और रथ की रस्सी खींचने के लिए उत्साहित नजर आया।
राज्यपाल और CM ने खींचा महाप्रभु का रथ
रांची की ऐतिहासिक रथयात्रा में राज्यपाल संतोष गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए। दोनों ने भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की।
इसके बाद मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने श्रद्धालुओं के साथ मिलकर महाप्रभु का रथ खींचा। सीएम हेमंत सोरेन ने इस मौके पर जगन्नाथपुर मंदिर को पर्यटन के नक्शे पर और मजबूत पहचान दिलाने की बात कही।
मंदिर की पहचान बनेगा भव्य तोरण द्वार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि धुर्वा स्थित जगन्नाथ मंदिर को दूर से पहचान दिलाने के लिए मंदिर से जुड़ने वाली सड़क पर भव्य तोरण द्वार बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों को नई पहचान देने का काम किया जा रहा है।
108 दीपों से हुई मंगल आरती, 15 दिन बाद दिए दर्शन
रथयात्रा से पहले भगवान जगन्नाथ का 15 दिनों का एकांतवास समाप्त हुआ। नेत्रदान की परंपरा पूरी होने के बाद भगवान ने भक्तों को दर्शन दिए।
मंदिर में 108 दीपों से भव्य मंगल आरती की गई और भगवान को मालपुआ का भोग लगाया गया।
रथ के साथ शुरू हुआ 10 दिवसीय मेला
भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान कर मौसीबाड़ी ले जाया गया। 25 जुलाई को घुरती रथयात्रा के साथ भगवान वापस मंदिर लौटेंगे।
रथ मेले को लेकर सुरक्षा के भी खास इंतजाम किए गए हैं। करीब 2000 पुलिस जवान, 215 सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से पूरे इलाके की निगरानी की जा रही है।
पलामू-हजारीबाग में दिखा परंपरा और तकनीक का संगम
झारखंड के अन्य जिलों में भी रथयात्रा की धूम रही। पलामू में वर्षों पुरानी परंपरा के बीच इस्कॉन का 41 फीट ऊंचा हाइड्रोलिक रथ आकर्षण का केंद्र बना।
वहीं हजारीबाग में आईआईटी इंजीनियरों द्वारा तैयार हाइड्रोलिक और रिमोट कंट्रोल रथ ने श्रद्धालुओं को आकर्षित किया।