रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और ओएमआर शीट हेराफेरी मामले में CID की SIT ने जांच तेज कर दी है। कोर्ट से पांच दिनों की रिमांड मिलने के बाद गिरफ्तार आरोपियों से आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जा रही है।
पूछताछ के दौरान CID ने JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के निदेशक रामबीर सिंह को आमने-सामने बैठाया।
CID का सबसे बड़ा सवाल—ब्लैकलिस्टेड कंपनी को टेंडर क्यों?
SIT ने सवाल किया कि जब TDPL पर पहले से गंभीर लापरवाही और वित्तीय विवादों के आरोप थे और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया था, तो फिर उसे दोबारा संवेदनशील परीक्षाओं की जिम्मेदारी कैसे दे दी गई?
सूत्रों के मुताबिक, इस सवाल पर उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं।
दो और गिरफ्तारियां, जांच का दायरा बढ़ा
CID ने मामले में दो और लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें JPSC कर्मचारी सोनू कुमार और TDPL के मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी के सहयोगी अरविंद कुमार शामिल हैं। दोनों पर OMR शीट में हेराफेरी और डेटा टेंपरिंग के आरोप हैं।
JSSC CGL पर भी उठे सवाल
इधर JSSC CGL परीक्षा में चयनित सहायक प्रशाखा पदाधिकारी अंशुमान तिवारी के नाम से वायरल पत्र ने भी विवाद खड़ा कर दिया है। पत्र में भाषा और व्याकरण की गलतियों को लेकर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि अंशुमान तिवारी ने वायरल पत्र को अपना नहीं बताया है।
छात्रों का आंदोलन जारी
14वीं JPSC सिविल सेवा पीटी और JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी के खिलाफ छात्र संगठन भी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका के पास अनिश्चितकालीन सत्याग्रह शुरू किया गया है।
CID ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से अपील की है कि परीक्षा से जुड़ी किसी भी गड़बड़ी की जानकारी या दस्तावेज उपलब्ध होने पर जांच एजेंसी से साझा करें।
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