शेखपुरा: जिला परिवहन कार्यालय में 15 हजार रुपये रिश्वत लेते लिपिक कुणाल कुमार की गिरफ्तारी ने शेखपुरा में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी कार्रवाई की पुरानी कड़ी को फिर चर्चा में ला दिया है। मंगलवार की कार्रवाई में निगरानी टीम ने ट्रैक्टर के ऑनर बुक ट्रांसफर के नाम पर कथित रिश्वत लेते कुणाल कुमार को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। उनके पास से 500-500 रुपये के 30 नोट यानी कुल 15 हजार रुपये बरामद किए गए।
लेकिन यह कार्रवाई अकेली नहीं है। उपलब्ध समाचार रिकॉर्ड बताते हैं कि पिछले वर्षों में शेखपुरा के भू-अर्जन, राजस्व, नगर परिषद, शिक्षा, अनुमंडल प्रशासन और अन्य सरकारी तंत्र से जुड़े मामलों में निगरानी की कार्रवाई सामने आती रही है।
DTO में पहली कार्रवाई, कलेक्ट्रेट में तीसरी बड़ी रेड
ताजा मामले में अरियरी थाना क्षेत्र के डीहा निवासी राजू प्रसाद की शिकायत पर निगरानी ने सत्यापन कराया। आरोप सही पाए जाने के बाद जाल बिछाया गया और कुणाल कुमार को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ लिया गया। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, DTO कार्यालय में यह निगरानी की पहली कार्रवाई है, जबकि कलेक्ट्रेट परिसर में यह तीसरी बड़ी निगरानी कार्रवाई बताई गई है। इससे पहले SDO कार्यालय के पेशकार, शिक्षा विभाग के लिपिक और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख है।
भू-अर्जन पदाधिकारी मो. कामिल अख्तर पर कार्रवाई
शेखपुरा के तत्कालीन भू-अर्जन पदाधिकारी मो. कामिल अख्तर को वर्ष 2017 में निगरानी टीम ने 10 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। आरोप था कि अधिग्रहित जमीन की मुआवजा राशि दिलाने के एवज में रिश्वत मांगी गई थी। निगरानी टीम ने शिकायत के सत्यापन के बाद उन्हें उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार किया था।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि कार्रवाई सीधे एक प्रशासनिक अधिकारी के खिलाफ हुई थी और उस समय इसे जिले की बड़ी निगरानी कार्रवाई के रूप में रिपोर्ट किया गया था।
बरबीघा नगर परिषद में 48 हजार का ट्रैप
जनवरी 2022 में बरबीघा नगर परिषद के तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी विजय कुमार को निगरानी की विशेष टीम ने 48 हजार रुपये कथित रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। शिकायत एक संवेदक ने की थी। आरोप था कि कराए गए कार्य के भुगतान के एवज में रकम मांगी गई थी।
सत्यापन के बाद निगरानी टीम ने नगर परिषद कार्यालय में ही कार्रवाई की और विजय कुमार को कथित रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया। बाद में इस मामले में उनके खिलाफ चार्जशीट और विभागीय कार्रवाई की खबर भी सामने आई।
भूमि मामलों में भी निगरानी का शिकंजा
भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में भी शेखपुरा निगरानी कार्रवाई के दायरे में रहा है। नवंबर 2022 में बरबीघा के सर्किल इंस्पेक्टर संजीव कुमार और अमीन सोनी को 70 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। कार्रवाई पंचायत भवन में की गई थी।
इस मामले ने जमीन से जुड़े कामों में कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी थी।
अरियरी CO अंकु गुप्ता के आवास पर लंबी छापेमारी
अप्रैल 2025 में शेखपुरा के अरियरी की CO अंकु गुप्ता के आवास पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट ने लंबी छापेमारी की। रिपोर्टों के अनुसार, उनके आवास से करीब 35 हजार रुपये नकद तथा जमीन और निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए। उनके पति प्रिंस राज भी कार्रवाई के दायरे में थे और उन पर पहले से भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला चल रहा था।
इस कार्रवाई में आय से अधिक संपत्ति और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच का एंगल सामने आया था। हालांकि, इसे साधारण रिश्वत ट्रैप के साथ जोड़ना उचित नहीं होगा—यह अलग प्रकृति की आय से अधिक संपत्ति/भ्रष्टाचार जांच थी।
माप-तौल विभाग तक पहुंचा था निगरानी का शिकंजा
सितंबर 2013 में निगरानी ब्यूरो ने माप-तौल नियंत्रक सह कृषि निदेशक जय प्रकाश नारायण को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। शिकायतकर्ता प्रवीण कुमार सिन्हा, जो शेखपुरा के माप-तौल निरीक्षक थे, ने अंतिम वेतन प्रमाणपत्र जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने की शिकायत की थी। कार्रवाई के दौरान जय प्रकाश नारायण को उनके शेखपुरा स्थित कार्यालय से गिरफ्तार किया गया था।
शिक्षा और SDO कार्यालय भी कार्रवाई के दायरे में
उपलब्ध स्थानीय रिपोर्टों में शेखपुरा के शिक्षा विभाग के एक लिपिक और SDO कार्यालय के पेशकार के खिलाफ भी निगरानी कार्रवाई का उल्लेख मिलता है। 2022 की एक रिपोर्ट में जिले में निगरानी की पूर्व कार्रवाइयों का जिक्र करते हुए भू-अर्जन पदाधिकारी, पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर, शेखोपुरसराय के बैंक मैनेजर, जिला सहकारिता कार्यालय के प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी, SDO कार्यालय के पेशकार और शिक्षा विभाग के लिपिक को कार्रवाई का सामना करने वालों में बताया गया था।
परिवहन विभाग पर पहले भी उठे सवाल
ताजा DTO ट्रैप से अलग, परिवहन विभाग से जुड़े पुराने मामलों में भी अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। इसलिए कुणाल कुमार की गिरफ्तारी को परिवहन कार्यालय में निगरानी की पहली ट्रैप कार्रवाई कहना ज्यादा सटीक है, न कि जिले में परिवहन विभाग से जुड़ी पहली भ्रष्टाचार शिकायत।
आंकड़ों की तस्वीर क्या कहती है?
उपलब्ध सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों को जोड़ने पर शेखपुरा में निगरानी की कार्रवाई का दायरा सिर्फ एक विभाग तक सीमित नहीं दिखता। परिवहन, भू-अर्जन, राजस्व, नगर परिषद, शिक्षा, अनुमंडल प्रशासन और अन्य विभागों से जुड़े मामलों में कार्रवाई सामने आई है।
लेकिन 2008 से 2026 तक पूरे जिले में निगरानी द्वारा गिरफ्तार/कार्रवाई किए गए अधिकारियों-कर्मचारियों की एक आधिकारिक समेकित संख्या सार्वजनिक स्रोतों से अभी प्रमाणित नहीं होती। इसलिए किसी अनुमानित संख्या को “आधिकारिक आंकड़ा” बताना सही नहीं होगा।
फिलहाल पुष्ट मामलों में सामने आने वाले नामों में कुणाल कुमार, मो. कामिल अख्तर, विजय कुमार, संजीव कुमार, सोनी अमीन, अंकु गुप्ता, प्रिंस राज और जय प्रकाश नारायण शामिल हैं। इनमें सभी मामले एक ही तरह के नहीं हैं—कुछ सीधे रिश्वत ट्रैप हैं, जबकि कुछ आय से अधिक संपत्ति/भ्रष्टाचार की जांच से जुड़े हैं।
शेखपुरा में निगरानी की कार्रवाई का संदेश
DTO कार्यालय में ताजा ट्रैप के बाद एक बात साफ है—सरकारी दफ्तर में रिश्वत की मांग की शिकायत निगरानी तक पहुंचने पर कार्रवाई हो सकती है। कुणाल कुमार की गिरफ्तारी के साथ एक बार फिर कलेक्ट्रेट परिसर में निगरानी की कार्रवाई चर्चा में है और अब जांच का अगला फोकस यह भी रहेगा कि इस कथित रिश्वत प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
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